बलौदाबाजार-भाटापारा। सेकंड हैंड मोबाइल खरीदने का बढ़ता चलन लोगों के लिए मुसीबत का कारण भी बन सकता है। बिना जांच-पड़ताल के खरीदा गया सस्ता मोबाइल न केवल चोरी का हो सकता है, बल्कि किसी बड़े साइबर अपराध से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में खरीदार खुद पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि बाजार कीमत से बेहद कम दाम में मिलने वाले मोबाइल अक्सर संदेह के घेरे में होते हैं और इनके पीछे चोरी, ठगी या साइबर अपराध का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना बिल का मोबाइल खरीदना गंभीर जोखिम मोल लेने जैसा है। यदि मोबाइल चोरी का निकला तो खरीदार को भी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मोबाइल खरीदने से पहले उसका मूल बिल, IMEI नंबर, विक्रेता का पहचान पत्र और लिखित बिक्री रसीद लेना बेहद जरूरी है।
पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सड़क किनारे या सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदिग्ध ऑफरों के झांसे में न आएं। “50 हजार का मोबाइल 10 हजार में” जैसे ऑफर लालच नहीं, बल्कि खतरे की घंटी हैं।
मोबाइल खरीदने से पहले IMEI नंबर को CEIR पोर्टल या KYM ऐप पर जांचने की सलाह दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फोन ब्लैकलिस्टेड या चोरी का नहीं है।
बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति बिना बिल का या संदिग्ध मोबाइल बेचने की कोशिश करता है तो उसकी सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या डायल-112 पर दें।
पुलिस का साफ संदेश— “थोड़ी सी सावधानी आपको हजारों रुपये के नुकसान और कानूनी कार्रवाई से बचा सकती है। सस्ते के लालच में ऐसा सौदा न करें, जो आगे चलकर महंगा साबित हो जाए।”