देवगढ़ जंगल में अवैध कटाई, वन विभाग मौन

SARJU PRASAD SAHU

June 12, 2026

कोरिया। कोरिया वन मंडल के अंतर्गत आने वाले देवगढ़ वन परिक्षेत्र में वन संपदा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र के जंगलों में अवैध कटाई का कारोबार बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है, जबकि जिम्मेदार वन अमला कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक बना हुआ नजर आ रहा है। हालत यह है कि कैलासपुर से लेकर कटगोड़ी तक दिनदहाड़े जंगलों से कीमती पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों को मुख्य सड़कों के रास्ते बाहर ले जाया जा रहा है, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई प्रभावी रोकथाम दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय लोगों और जंगल प्रेमियों का आरोप है कि वन क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कटाई का सिलसिला जारी है। जंगलों से लकड़ियों की ढुलाई खुलेआम की जा रही है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इन गतिविधियों से अनजान कैसे हैं। लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक और मीडिया कैमरे इन घटनाओं को कैद कर सकते हैं, तो क्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर सहित अन्य वन कर्मियों की नजर इन गतिविधियों पर क्यों नहीं पड़ रही।

सबसे हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि देवगढ़ वन परिक्षेत्र से होकर संबंधित अधिकारियों का नियमित आवागमन होता है। इसके बावजूद अवैध कटाई और लकड़ी परिवहन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी आम है कि आखिर ऐसी गतिविधियां किसके संरक्षण में संचालित हो रही हैं।

वन क्षेत्र में लगातार हो रही कटाई का असर अब पर्यावरण पर भी दिखाई देने लगा है। जंगल प्रेमियों का कहना है कि वर्षों पुराने और बहुमूल्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र की हरियाली तेजी से समाप्त हो रही है। जिन जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग पर है, वहीं सबसे अधिक अवैध कटाई और अतिक्रमण की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे वन संरक्षण को लेकर विभाग के दावों की वास्तविकता उजागर होती दिखाई दे रही है।

एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चला रही है। “एक पेड़ मां के नाम” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुराने और विशाल वृक्ष लगातार कुल्हाड़ी की भेंट चढ़ रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मौजूदा जंगलों को ही नहीं बचाया जा सकेगा तो वृक्षारोपण अभियानों का वास्तविक उद्देश्य कितना सफल हो पाएगा।

पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते अवैध कटाई पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र के वन क्षेत्रफल में कमी आने के साथ-साथ जैव विविधता पर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा और पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने कोरिया वन मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के जंगलों को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।

देवगढ़ वन परिक्षेत्र में खुलेआम हो रही अवैध कटाई।कैलासपुर से कटगोड़ी तक लकड़ियों की दिनदहाड़े ढुलाई।वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल।पर्यावरण और जैव विविधता पर मंडरा रहा खतरा।स्थानीय लोगों ने उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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