एक पर बेदखली, अब पूरे लरिया के कब्जों की बारी 30 जून के आदेश के बाद शैलकुमार ने पंचायत में दिया आवेदन, कहा—जहां-जहां बेजा कब्जे की शिकायत, वहां भी हो जांच

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

October 6, 2026

मामला गरमाया तो अब नजर राजस्व अमले पर, मौके की जांच से ही साफ होगी असली तस्वीर

पलारी। ग्राम लरिया में जमीन पर कब्जे को लेकर चल रहा मामला अब धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता जा रहा है। एक तरफ तहसील कार्यालय से शैलकुमार मांजरे के खिलाफ बेदखली वारंट जारी हो चुका है, तो दूसरी तरफ अब शैलकुमार ने ही गांव में जहां-जहां कथित बेजा कब्जे हैं, उनकी भी जांच कराने की मांग पंचायत के सामने रख दी है। ऐसे में अब गांव में चर्चा है कि एक मामले में कार्रवाई हुई है तो बाकी शिकायतों पर प्रशासन का रुख क्या रहेगा? मामले में सामने आए दस्तावेज के मुताबिक 30 जून 2026 को नायब तहसीलदार, पलारी न्यायालय से बेदखली वारंट जारी किया गया था। वारंट में ग्राम लरिया की भूमि से जुड़े प्रकरण का उल्लेख है। इसमें खसरा नंबर 1465/1/क, कुल रकबा 7.735 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है और संबंधित भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय मद में दर्ज बताया गया है।

दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि उक्त भूमि के 200 वर्गमीटर हिस्से पर शैलकुमार मांजरे द्वारा अतिक्रमण कर मकान निर्माण किए जाने की बात प्रकरण में सामने आई थी। इसी आधार पर बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वारंट में 9 जुलाई 2026 तक कब्जा हटाकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का उल्लेख भी है।

बेदखली के बाद शैलकुमार ने खोला दूसरा मुद्दा

अब मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। 4 अक्टूबर 2026 को शैलकुमार मांजरे ने ग्राम पंचायत लरिया की सरपंच रीना डहरिया को आवेदन सौंप दिया। आवेदन में मांग की गई है कि गांव में जहां-जहां कथित रूप से बेजा कब्जे किए गए हैं, उनकी भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।आवेदक के अनुसार आवेदन पंचायत में जमा किया गया और उसकी पावती भी प्राप्त हुई है।शैलकुमार का कहना है कि अगर गांव में अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई हो रही है तो बाकी मामलों की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

अब गांव में उठ रहा सीधा सवाल

मामले के बाद गांव में सबसे बड़ा सवाल यही चर्चा में है कि क्या जांच सिर्फ एक मामले तक रहेगी या फिर पंचायत क्षेत्र में बताए जा रहे दूसरे कथित कब्जों की भी जांच होगी?

हालांकि जिन अन्य स्थानों पर कब्जे की बात कही जा रही है, उनकी वास्तविक स्थिति अभी जांच का विषय है। किसी जमीन पर अतिक्रमण है या नहीं, यह राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन और मौके की जांच के बाद ही तय हो सकता है।यानी फिलहाल मामला आरोप और जवाबी आरोप से आगे बढ़कर जांच की मांग तक पहुंच चुका है।

सरपंच से बात की कोशिश, नहीं उठा फोन

मामले में पंचायत का पक्ष जानने के लिए 6 अक्टूबर को सरपंच रीना डहरिया से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसलिए फिलहाल इस मामले में सरपंच की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब नजर राजस्व अमले की ओर

एक तरफ बेदखली का आदेश, दूसरी तरफ पूरे गांव के कथित कब्जों की जांच की मांग। ऐसे में अब लरिया के इस मामले में अगला कदम राजस्व अमले की कार्रवाई से ही साफ होगा।

क्या आवेदन में बताए गए स्थानों का मौके पर सत्यापन होगा? क्या सीमांकन कराया जाएगा? क्या राजस्व रिकॉर्ड खंगाला जाएगा? और जांच में यदि कहीं नियम विरुद्ध कब्जा पाया जाता है तो क्या नियमानुसार कार्रवाई होगी?फिलहाल लरिया में चर्चा एक ही बात की है—एक मामले में कार्रवाई हुई, अब बाकी कथित कब्जों की जांच कब होगी?4 अक्टूबर का आवेदन पंचायत तक पहुंच चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस आवेदन की फाइल पंचायत से निकलकर तहसील कार्यालय तक कब पहुंचती है और राजस्व अमला मौके पर कब पहुंचता है।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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