त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक मामले में 15 दिन बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग,

BHUPENDRA SINHA

October 4, 2026

छुरा/गरियाबंद :- शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत सितंबर 2026 में आयोजित त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। मामले को लेकर जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत छुरा ब्लॉक के दुल्ला हाई स्कूल में आयोजित विशेष शिविर के दौरान जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी गरियाबंद को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संकुल केंद्र दुल्ला तथा संकुल केंद्र नयापारा से संबंधित व्हाट्सएप ग्रुपों में त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही साझा किए गए। यदि परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व प्रश्न-पत्र संबंधित विद्यार्थियों अथवा अन्य लोगों तक पहुंचा है, तो इससे परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता और पूरी मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

परीक्षा की गोपनीयता पर उठे गंभीर सवाल,

शिकायत में कहा गया है कि किसी भी परीक्षा में प्रश्न-पत्र की गोपनीयता बनाए रखना संबंधित विभाग और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्न-पत्र का किसी अनधिकृत माध्यम से प्रसारित होना परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।

इस तरह की स्थिति में उन विद्यार्थियों को नुकसान होने की आशंका रहती है, जिन्होंने बिना किसी पूर्व जानकारी के पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी। वहीं जिन विद्यार्थियों तक प्रश्न-पत्र पहले पहुंच गया हो, उन्हें अनुचित लाभ मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

इसी वजह से शिकायतकर्ता ने केवल प्रश्न-पत्र किस व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया, इसकी जांच तक मामला सीमित नहीं रखने की मांग की है, बल्कि प्रश्न-पत्र तैयार होने से लेकर उसे सुरक्षित रखने, संकुल केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा केंद्रों में वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

DEO के कथित बयान को लेकर भी सवाल,

प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कथित तौर पर दिए गए एक बयान को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, जब पत्रकारों ने जिला शिक्षा अधिकारी से इस मामले में जानकारी लेने का प्रयास किया तो उनके द्वारा कथित रूप से कहा गया कि “उपरोक्त परीक्षा सामान्य स्तर की है और इसके अंक नहीं जुड़ते हैं।” शिकायतकर्ता ने इस कथित बयान को परीक्षा के महत्व को कम करके प्रस्तुत करने वाला बताया है और इसकी भी जांच की मांग की है।

आवेदन में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक GENCOR6083/2025/20-1, नया रायपुर, दिनांक 26 सितंबर 2025 का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि त्रैमासिक परीक्षा के 20 प्रतिशत अंक मुख्य/वार्षिक मूल्यांकन में शामिल किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में शिकायत में कहा गया है कि यदि विभागीय आदेश में त्रैमासिक परीक्षा के अंकों को मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, तो परीक्षा को “अंक नहीं जुड़ने वाली” बताने वाले कथित बयान की वास्तविकता और संदर्भ की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा वास्तव में किस संदर्भ में उक्त बयान दिया गया और विभागीय आदेश की सही व्याख्या क्या है, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में कई बिंदुओं पर जांच की मांग,

कलेक्टर को दिए आवेदन में मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। आवेदन में विशेष रूप से उन व्हाट्सएप ग्रुपों की जांच करने की मांग की गई है, जिनमें कथित रूप से परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र साझा किए गए थे।

जांच के दौरान प्रश्न-पत्र किस तारीख और किस समय ग्रुप में भेजा गया, उसे किस व्यक्ति ने भेजा, प्रश्न-पत्र मूल रूप से कहां से प्राप्त हुआ, परीक्षा शुरू होने से पहले वह किन-किन लोगों तक पहुंचा और परीक्षा केंद्रों तक प्रश्न-पत्र पहुंचाने की प्रक्रिया क्या थी, जैसे बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने प्रश्न-पत्र तैयार करने और उसे सुरक्षित रखने से लेकर संबंधित स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यदि प्रश्न-पत्र वास्तव में लीक हुआ है तो वह किस स्तर से बाहर आया।

15 दिन बाद भी कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल,

शिकायत के अनुसार, करीब 15 दिन होने को हैं। इसके बावजूद अभी तक जांच की स्थिति और कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसको लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है। इसलिए यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि जांच टीम ने अब तक क्या कार्रवाई की है, किन लोगों के बयान लिए गए हैं और संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप एवं दस्तावेजों की जांच किस स्तर तक पहुंची है।

कलेक्टर रणवीर शर्मा ने कहा- DEO को अवगत कराया गया,

मामले को लेकर जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रणवीर शर्मा से बात की गई। उन्होंने बताया कि शिकायत संबंधी आवेदन प्राप्त हुआ है और आवेदन के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

DEO राजेश चन्द्राकर बोले- जांच टीम गठित की गई,

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकर से इस संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए जांच टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच टीम द्वारा मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रश्न-पत्र के कथित रूप से परीक्षा पूर्व प्रसारित होने की पुष्टि होती है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

शिकायत के साथ दस्तावेज भी किए गए संलग्न,

आवेदन के साथ मामले से जुड़े कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें कथित रूप से संकुल केंद्र द्वारा संकुल के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे गए प्रश्न-पत्र के स्क्रीनशॉट, स्कूल शिक्षा विभाग का 26 सितंबर 2025 का संबंधित आदेश, इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि प्रश्न-पत्र कब और किस माध्यम से साझा हुआ तथा परीक्षा शुरू होने से पहले उसके प्रसार की वास्तविक स्थिति क्या थी।

विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला,

त्रैमासिक परीक्षा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के आकलन की प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र के कथित प्रसार का मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों के बीच समान अवसर और परीक्षा की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।

यदि जांच में प्रश्न-पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले अनधिकृत रूप से साझा किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रश्न-पत्र किस स्तर से बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति भी सामने आना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच बनी शंकाओं का समाधान हो सके।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें,

फिलहाल शिकायत को लेकर जिला प्रशासन की ओर से जांच की बात कही गई है और जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार जांच टीम भी गठित की जा चुकी है। लेकिन शिकायत किए जाने के करीब 15 दिन बाद भी जांच की प्रगति और ठोस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से सवाल बने हुए हैं।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच टीम कब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और जांच में प्रश्न-पत्र के कथित लीक होने, संबंधित संकुल केंद्रों की भूमिका, प्रश्न-पत्र प्रसारित करने वाले व्यक्तियों तथा जिला शिक्षा अधिकारी के कथित बयान से जुड़े तथ्यों पर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।

मामले में वास्तविक दोष, जिम्मेदारी और विभागीय लापरवाही का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल जिला प्रशासन द्वारा जांच कर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

सह संपादक

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