फूलबाहरा गांव की 2.89 हेक्टेयर शासकीय चारागाह भूमि का मामला, पूर्व में तहसील कार्यालय और कलेक्टर जनदर्शन में भी की जा चुकी है शिकायत,
छुरा/गरियाबंद :- ग्राम फूलबाहरा में शासकीय चारागाह भूमि पर कथित अवैध कब्जे और खेती किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में तहसीलदार छुरा को लिखित आवेदन सौंपकर मामले की तत्काल जांच कराने, शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार को दिए गए आवेदन के अनुसार, ग्राम फूलबाहरा, विकासखंड छुरा, जिला गरियाबंद में स्थित शासकीय चारागाह भूमि खसरा क्रमांक 7 के एक हिस्से में लगभग 2.89 हेक्टेयर भूमि शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त भूमि पर श्रवण नेताम पिता लखन राम नेताम, निवासी ग्राम दादरगांव (नया), विकासखंड छुरा, जिला गरियाबंद द्वारा पिछले कई वर्षों से कथित रूप से अवैध रूप से खेती की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय चारागाह के रूप में दर्ज है और इसका उपयोग ग्राम के पशुओं के चराई क्षेत्र के रूप में किया जाना चाहिए। लेकिन भूमि पर कथित कब्जे और खेती किए जाने के कारण गांव के पशुपालकों एवं ग्रामीणों को अपने मवेशियों के लिए चराई की व्यवस्था करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई बार मना करने के बावजूद कब्जा नहीं हटाने का आरोप,
आवेदन में ग्रामीणों ने बताया है कि संबंधित व्यक्ति को गांव के लोगों द्वारा कई बार उक्त शासकीय भूमि पर खेती नहीं करने और भूमि को खाली करने के लिए कहा गया। इसके बावजूद ग्रामीणों के अनुसार संबंधित व्यक्ति द्वारा उनकी बात नहीं मानी गई और कथित रूप से शासकीय चारागाह भूमि पर खेती जारी रखी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से चली आ रही इस स्थिति के कारण गांव में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को केवल शिकायत के स्तर पर लंबित रखने के बजाय मौके पर राजस्व अधिकारियों की टीम भेजकर भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए।
तहसील कार्यालय और कलेक्टर जनदर्शन में पहले भी शिकायत,
ग्रामीणों के अनुसार, चारागाह भूमि से कथित अवैध कब्जा हटाने को लेकर पूर्व में भी तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके अलावा ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में भी इस मामले को उठाकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कथित कब्जा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और भूमि के उपयोग की जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित भूमि का वर्तमान में किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है और उस पर किसी व्यक्ति का कब्जा है या नहीं।
कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका,
आवेदन में ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया है कि यदि शासकीय चारागाह भूमि को शीघ्र कब्जामुक्त नहीं कराया गया तो ग्रामीण अपने पशुओं को चराने के लिए उक्त भूमि का उपयोग करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित पक्ष के साथ विवाद उत्पन्न होने तथा गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी प्रकार का विवाद या टकराव नहीं चाहते, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई के माध्यम से समस्या का समाधान चाहते हैं। इसलिए किसी अप्रिय स्थिति से पहले प्रशासन द्वारा मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करना आवश्यक है।
सीमांकन और मौके की जांच की मांग,
ग्रामीणों ने तहसीलदार से मांग की है कि संबंधित खसरा नंबर की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराई जाए तथा आवश्यकता होने पर राजस्व अमले के माध्यम से मौके का निरीक्षण एवं सीमांकन कराया जाए। यदि जांच में शासकीय चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा अथवा अनधिकृत खेती पाया जाता है तो नियमानुसार भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि भविष्य में शासकीय चारागाह भूमि पर दोबारा किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो, इसके लिए आवश्यक राजस्व कार्रवाई एवं निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राम के पशुओं के लिए निर्धारित चराई भूमि सुरक्षित रह सके।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा मामले की जांच और आगे की कार्रवाई किस स्तर पर की जाती है, इस पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।