गांधी जी के तीन बंदरों की तर्ज पर PMGSY अधिकारी, न देखते गड़बड़ी, न सुनते शिकायत, न बोलते कार्रवाई की बात

SARJU PRASAD SAHU

April 27, 2026

कोरिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कोरिया जिले के सोनहत–रामगढ़ मार्ग T‑01 से कछाड़ी पहुंच मार्ग (लगभग 16 किलोमीटर) पर चल रहे रिटर्निंग वॉल और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस ग्राम सड़क की गुणवत्ता शुरू से ही सवालों के घेरे में है, जबकि स्थानीय प्रशासन और PMGSY के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध “गांधी जी के तीन बंदरों” जैसी तुलना की जा रही है—जो न देखते, न सुनते, न बोलते। रिटर्निंग वॉल निर्माण में भारी अनियमितताएं, मानकों को दरकिनार कर ठेकेदार की मनमानीस्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे बनाई जा रही रिटर्निंग वॉल (Retaining Wall) में तय मानकों का बिलकुल पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर रेत, गिट्टी और सीमेंट का अनुपात सही न होने की वजह से दीवार बनते‑बनते ही भुरभुरी होकर टूटने लगी है। नियमित पानी तराई (क्योरिंग) न होने के कारण हल्की‑हल्की दरारें भी साफ‑साफ दिखाई दे रही हैं, जो भविष्य में बड़े हादसे या दीवार के ढहने का खतरा पैदा कर सकती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रिटर्निंग वॉल का बेस (नींव) भी कमजोर बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से नीचे की ऊंचाई, मिट्टी की स्थिरता और नींव की गहराई को लेकर मानकों का कोई खास ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कई लोगों का आरोप है कि सरिया (स्टील रॉड) का उपयोग भी पर्याप्त नहीं किया जा रहा, जबकि अनुमान (Estimate) में इसका प्रावधान होना चाहिए। इस मामले पर भी जिम्मेदारों से जांच की मांग उठ रही है। ठेकेदार की मनमानी, अधिकारियों की आंख–कान–मुंह बंदस्थानीय निवासी और ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और ठेकेदार PMGSY के नाम पर मनमानी कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इन सब को जानकर भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। शिकायतों के बाद भी न तो मौके पर गंभीर निरीक्षण किया जा रहा है और न ही ठोस कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट कदम उठाया जा रहा है। इस वजह से पूरा मामला लीपापोती और ढंग से निपटाने तक ही सीमित लग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी निर्माण की गड़बड़ियों को देखना नहीं चाहते, फोन पर शिकायत सुनना नहीं चाहते और जवाब देकर कार्रवाई की बात करना भी उन्हें अनुचित लगता है, ताकि उनके “मुंह से न निकले” कि उन्होंने गड़बड़ी की। इसी वजह से ग्रामीणों ने इन्हें गांधी जी के तीन बंदरों से तुलना की है—न देखते, न सुनते, न बोलते। करोड़ों की लागत की फिजूलखर्ची का डरसोनहत–रामगढ़ और कछाड़ी पहुंच मार्ग पर PMGSY के तहत करोड़ों रुपये की लागत से सड़क और रिटर्निंग वॉल का निर्माण हो रहा है, लेकिन मानकों की अनदेखी और जांच‑निगरानी की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीण इसे भविष्य में सरकारी धन की व्यर्थ बर्बादी और भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बनने की आशंका जता रहे हैं।अब यह देखना होगा कि PMGSY के जिम्मेदार अधिकारियों और जिला प्रशासन की तरफ से इस मामले में सख्ती से की जांच होती है और निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाती है, या फिर जिम्मेदारों की “तीन बंदरों वाली चुप्पी” इस योजना के नाम पर भ्रष्टाचार और जनता के विश्वास को और कमजोर करती रहेगी।

संपादक { विज्ञापन‍ }

Share this content:

Leave a Comment