पर्यावरण संरक्षक पूरन निषाद: हरियाली बचाने को समर्पित किया अपना जीवन
बसना/महासमुंद।बसना विकासखंड के ग्राम बड़ेडाभा के निवासी पूरन निषाद पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। केवल प्राथमिक स्तर तक शिक्षा प्राप्त करने वाले पूरन निषाद ने अपनी सोच और संकल्प के दम पर जीवन का उद्देश्य वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण को बना लिया है।
उन्होंने अब तक अपने प्रयासों से लगभग एक हजार पेड़ों का रोपण एवं संरक्षण किया है। इनमें लगाए गए कई फलदार वृक्ष अब फल भी देने लगे हैं। पूरन निषाद विशेष रूप से आम, पीपल, बरगद, अमरूद, आंवला, जामुन तथा अन्य देशी प्रजातियों के वृक्षों के संरक्षण और रोपण पर ध्यान दे रहे हैं, जिनमें से कई प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं।
पूरन निषाद का मानना है कि वर्तमान भौतिकवादी जीवनशैली और लगातार घटते हरित क्षेत्र के कारण पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे समय में वृक्षारोपण ही प्रकृति को बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनका कहना है कि सरकार को सड़कों के किनारे विदेशी प्रजाति के पेड़ों की बजाय अधिक से अधिक फलदार एवं देशी वृक्षों का रोपण करना चाहिए। उनका तर्क है कि फलदार वृक्ष न केवल लोगों को फल उपलब्ध कराते हैं, बल्कि जैव विविधता को भी संरक्षित रखते हैं और अनेक पक्षियों व छोटे जीव-जंतुओं का आश्रय बनते हैं।
हालांकि पूरन निषाद का कहना है कि उनके कार्य को अब तक वह प्रोत्साहन और सहयोग नहीं मिल पाया है, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बावजूद वे बिना किसी स्वार्थ के पर्यावरण संरक्षण के अपने अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
ग्राम बड़ेडाभा के इस पर्यावरण प्रहरी का प्रयास समाज और विशेषकर युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ पेड़ लगाकर उनकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।