प्रतिदिन 34 हजार लीटर दूध का हो रहा क्रय-विक्रय, 156 दुग्ध समितियां सक्रिय
बसना/महासमुंद। 06 जून 2026। जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन बनता जा रहा है। 21वीं पशुगणना के अनुसार जिले में कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है, जिससे प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन एवं विपणन किया जा रहा है।
दुग्ध खरीद के आंकड़े देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17,200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। वहीं निजी डेयरियों के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर दूध खरीदा जा रहा है:
· हर्षन डेयरी सरायपाली – 6000 लीटर प्रतिदिन
· शारदा डेयरी सरायपाली – 4000 लीटर प्रतिदिन
· शारदा डेयरी पिथौरा – 4000 लीटर प्रतिदिन
· प्रगति डेयरी सरायपाली – 2000 लीटर प्रतिदिन
· गाया डेयरी महासमुंद – 1000 लीटर प्रतिदिन
निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17,000 लीटर दूध खरीदा जा रहा है। इस प्रकार जिले से प्रतिदिन कुल 34,000 लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष से अधिक है।
दुग्ध समितियों का विस्तार जिले में दुग्ध विपणन का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। पिछले वर्ष 131 सक्रिय दुग्ध समितियाँ थीं, जबकि “सहकारिता से समृद्धि” की मंशानुरूप 25 नई समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियाँ संचालित हैं तथा 30 नई समितियाँ प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
उन्नत पशुपालन को बढ़ावा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को हरा चारा एवं साइलेज निर्माण हेतु प्रेरित किया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म का भ्रमण कराकर तकनीकी जानकारी दी गई है, जबकि 16 हितग्राहियों को अनुदान उपलब्ध कराया गया है। सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है, जिससे अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है।
महिलाओं एवं आदिवासी परिवारों को सशक्त बनाने की पहल
नीति आयोग के सहयोग से महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है। अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इसके अलावा NDDB द्वारा 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
चुनौतियाँ दाना एवं पशु आहार की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से पशुपालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनके द्वारा दूध की कीमतों में वृद्धि की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसके बावजूद जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।