वन विभाग के सतत प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा बारनवापारा
बलौदाबाज़ार, 23 दिसंबर 2025/
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, हरियाली और शांत वन वातावरण अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना रहा है। इसका जीवंत उदाहरण हाल ही में तब देखने को मिला, जब यूरोपीय देश लातविया से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक सुश्री बाइबा कालनीना बलौदाबाज़ार जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य पहुँचीं।
सुश्री बाइबा ने अभयारण्य में प्राकृतिक वातावरण के बीच सुकून भरे पल बिताए और जंगल सफारी के दौरान भालू, गौर, कृष्णमृग, सांभर एवं स्पॉटेड डियर जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में निर्भीक विचरण करते हुए देखा। उन्होंने बारनवापारा की नैसर्गिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण, समृद्ध फ्लोरा-फौना, वन्यजीव प्रबंधन एवं इको-टूरिज्म व्यवस्था की खुले दिल से प्रशंसा की।
गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा बारनवापारा अभयारण्य में सुरक्षित, नियंत्रित एवं सतत इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय समुदायों की सहभागिता के साथ संरक्षण, पर्यटन एवं आजीविका के बीच संतुलन स्थापित किया जा रहा है। राज्य शासन और वन विभाग के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के अभयारण्यों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बारनवापारा अभयारण्य में तेंदुआ, भालू, गौर, कृष्णमृग, सांभर, जंगली सूअर सहित अनेक प्रमुख वन्यजीवों को प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर मिलता है। साथ ही यहाँ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति इसे पक्षी प्रेमियों और प्रकृति शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष आकर्षण बनाती है।
उल्लेखनीय है कि 1 नवंबर 2025 से पुनः पर्यटकों के लिए खोले गए बारनवापारा अभयारण्य को इस वर्ष और अधिक सुदृढ़ सफारी व्यवस्थाओं के साथ विकसित किया गया है। अभयारण्य में रवान, पकरीद एवं बरबसपुर—तीन प्रमुख प्रवेश द्वारों से सफारी सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त विशेष लेपर्ड सफारी ज़ोन भी विकसित किया गया है, जहाँ तेंदुआ दर्शन की संभावनाएँ अत्यधिक हैं और यह पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आमद यह प्रमाणित करती है कि बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य अब छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।