कंजी में ‘कबीर मेडिकल’ पर गंभीर सवाल: मेडिकल की आड़ में इलाज का आरोप, बच्चों को ड्रिप लगाने की शिकायत

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

September 29, 2026

बिना डिग्री इलाज करने के आरोप, लाइसेंस किसी और के नाम होने की भी चर्चा; स्वास्थ्य विभाग की जांच का इंतजार

बलौदाबाजार-भाटापारा। जिले के ग्राम कंजी में संचालित बताए जा रहे कबीर मेडिकल’ को लेकर अब कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों, खासकर छोटे बच्चों का इलाज किया जा रहा है। यहां बच्चों को बोतल और ड्रिप लगाए जाने की शिकायत भी सामने आई है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो मामला सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था से जुड़ जाता है।

मेडिकल की आड़ में इलाज का आरोप

स्थानीय लोगों के मुताबिक, उक्त प्रतिष्ठान में दवा बिक्री के साथ मरीजों का उपचार भी किया जाता है। आरोप यह भी है कि इलाज करने वाले व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और डिग्री को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि वहां किस व्यक्ति द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है और उसके पास इसके लिए आवश्यक वैधानिक योग्यता है या नहीं।

सबसे गंभीर शिकायत छोटे बच्चों के इलाज को लेकर है। स्थानीय जानकारी के अनुसार बच्चों को कथित तौर पर ड्रिप और बोतल चढ़ाई जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

लाइसेंस किसी और के नाम, इलाज कोई और कर रहा?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि प्रतिष्ठान का मेडिकल लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है, जबकि मरीजों का उपचार कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है। यदि ऐसा है तो संबंधित दस्तावेज, लाइसेंस, फार्मासिस्ट की उपस्थिति और उपचार करने वाले व्यक्ति की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता की जांच आवश्यक होगी।

बताया जा रहा है कि प्रतिष्ठान सुबह करीब 6 से 10 बजे और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक संचालित होता है। इन दावों की वास्तविकता भी विभागीय निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

‘रसूख’ का दावा भी चर्चा में

मामले में एक और बात चर्चा में है। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर अपने राजनीतिक संपर्कों और क्षेत्रीय नेताओं से नजदीकी का हवाला देता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी जनप्रतिनिधि की संलिप्तता का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या कथित प्रभाव या रसूख के कारण शिकायतों की जांच प्रभावित हो रही है या फिर स्वास्थ्य विभाग निष्पक्ष रूप से पूरे मामले की जांच करेगा?

ड्रग अधिकारी ने कहा—‘अभी बिजी हूं, बाद में जांच करती हूं’

मामले में मेडिकल स्टोर पर कथित रूप से किए जा रहे उपचार की जानकारी लेने के लिए संवाददाता ने संबंधित ड्रग्स ऑफिसर से संपर्क किया। अधिकारी ने कहा कि वह फिलहाल व्यस्त हैं और बाद में जांच करेंगी।

अधिकारी ने यह भी बताया कि यदि किसी मेडिकल स्टोर में मरीजों का उपचार या प्रैक्टिस की जा रही है तो उस पर नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान आता है और यह उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है।

अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग इस शिकायत को किस स्तर पर लेता है और मौके पर जांच कब होती है?

सीएमएचओ से संपर्क नहीं हो सका

मामले की आधिकारिक पुष्टि और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलौदाबाजार से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला, जांच जरूरी

मामला बच्चों के उपचार से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। मेडिकल स्टोर पर वास्तव में कौन-कौन सी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, मरीजों का उपचार कौन कर रहा है, संबंधित व्यक्ति के पास क्या चिकित्सकीय योग्यता है और प्रतिष्ठान के पास कौन-कौन से वैध लाइसेंस हैं—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासन बिना किसी दबाव के मौके पर जांच करे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि शिकायतें गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति साफ की जाए।अब नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर है कि कंजी के ‘कबीर मेडिकल’ को लेकर सामने आए इन आरोपों की जांच कब होती है और विभाग की जांच में आखिर क्या सच्चाई सामने आती है।

 

 

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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