बलौदाबाजार। बहुजन समाज पार्टी विधानसभा इकाई कसडोल के तत्वावधान में 24 सितंबर 2026 को पूना पैक्ट धिक्कार दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संघर्ष, सामाजिक न्याय, समानता तथा बहुजन समाज के राजनीतिक अधिकारों को लेकर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में बसपा पदाधिकारियों एवं वक्ताओं ने पूना पैक्ट से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और उसके राजनीतिक प्रभावों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कांग्रेस और महात्मा गांधी की भूमिका को लेकर बसपा की राजनीतिक दृष्टि और आपत्तियों को भी सामने रखा।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व के ऐतिहासिक प्रसंग पर चर्चा
24 सितंबर 1932 को हुआ पूना पैक्ट तत्कालीन ‘Depressed Classes’ के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता था। इससे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड के Communal Award में ‘Depressed Classes’ के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान किया गया था। बाद में महात्मा गांधी के आमरण अनशन की पृष्ठभूमि में डॉ. आंबेडकर और अन्य नेताओं के बीच समझौता हुआ। इसके परिणामस्वरूप पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्वीकार की गई।
पूना पैक्ट में प्रांतीय विधानसभाओं में ‘Depressed Classes’ के लिए कुल 148 आरक्षित सीटों का प्रावधान किया गया था और इन सीटों के लिए संयुक्त निर्वाचन की व्यवस्था रखी गई थी।
बसपा द्वारा पूना पैक्ट धिक्कार दिवस मनाने का उद्देश्य इस ऐतिहासिक प्रसंग को बहुजन समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व और प्रभावी भागीदारी के सवाल से जोड़कर याद करना बताया गया।
शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए समाज के वंचित वर्गों को समान अधिकार, सम्मान और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी मिलना आवश्यक है। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के शिक्षा, संगठन और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए अनुसूचित जाति, आदिवासी, पिछड़े एवं अन्य वंचित वर्गों से जुड़े विभिन्न सामाजिक प्रश्नों को मजबूती से उठाने की बात कही।
वक्ताओं ने शिक्षा, रोजगार, भूमि-अधिकार, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
ये रहे मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रहलाद साहू, जिलाध्यक्ष बसपा, जिला बलौदाबाजार रहे। विशिष्ट अतिथियों में इंजीनियर रवि रविन्द्र, सी.एस. सांडे, अश्वनी सोनवानी, देवदत्त बरतामशी एवं अधिवक्ता नकुल बांधे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डेरहा डहरिया, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लवन ने की, जबकि संचालन राजकुमार डहरिया, विधानसभा अध्यक्ष बसपा कसडोल ने किया।
आयोजन को सफल बनाने में दुर्गा टंडन, भरत कुर्रे, रामकुमार खूंटे एवं आजेश कठोत्रे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल
कार्यक्रम में बसपा के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें बंशी कठोत्रे, सुनील कठोत्रे, इन्द्रपाल गायकवाड़, जनक गायकवाड़, मनहरण गायकवाड़, राधेश्याम मार्कण्डेय, उतरा सांडे, कृपाराम सांडे, पंचराम बघेल, कांशीराम रात्रे, भवानी गायकवाड़, बरातू बंजारे, नोहर भारद्वाज, राजकुमार सोनवानी, अश्वनी डायमंड, गोपाल घृतलहरे, भावसिंह पुरेना, नारायण बंजारे, मानकोजीलाल गायकवाड़, गजानंद यादव, विश्राम पटेल, गणेश केवट एवं कमल नारायण गायकवाड़ सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों तथा संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय के मूल्यों को मजबूत करने तथा बहुजन समाज के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।