दो नाबालिग बहनों से दुष्कर्म के मामले में दोषी को दोहरी उम्रकैद, पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला
भाटापारा (बलौदाबाजार): विशेष पॉक्सो न्यायालय भाटापारा ने दो सगी नाबालिग बहनों के अपहरण और दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में अहम फैसला सुनाते हुए अभियुक्त सनत साहू को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल की अदालत ने दोनों प्रकरणों में अभियुक्त को आजीवन कारावास, 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत के आदेशानुसार दोनों मामलों की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
2022 और 2024 में दर्ज हुए थे मामले सिमगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पहला मामला वर्ष 2022 में दर्ज किया गया था, जब एक नाबालिग बालिका के लापता होने की शिकायत मिली थी। जांच में अभियुक्त द्वारा पीड़िता को बहला-फुसलाकर ले जाने और दैहिक शोषण का मामला सामने आया। इसके बाद, अगस्त 2024 में उसी परिवार की दूसरी नाबालिग बहन को भी अभियुक्त द्वारा झांसे में लेकर दुष्कर्म करने का दूसरा मामला सामने आया। पीड़िताओं के अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण मामलों में पॉक्सो कानून के साथ-साथ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं।
महाराष्ट्र से हुई थी बरामदगी, स्कूल रिकॉर्ड बने अहम साक्ष्य पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से अंतर्राज्यीय अभियान चलाते हुए महाराष्ट्र से दोनों बालिकाओं को सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंपा था। न्यायालय में पीड़िताओं का नाबालिग होना सिद्ध करने के लिए स्कूल के दाखिला रजिस्टर और शैक्षणिक दस्तावेजों को प्राथमिक साक्ष्य बनाया गया। इसके अतिरिक्त मेडिकल व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर समयबद्ध चार्जशीट दाखिल की गई।
सजा का विवरण
- पहला प्रकरण (अपराध क्र. 443/2022): न्यायालय ने आईपीसी, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास तथा 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
- दूसरा प्रकरण (अपराध क्र. 293/2024): भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए पुनः आजीवन कारावास और 20 वर्ष के कठोर कारावास का दंडादेश दिया।
पीड़िता क्षतिपूर्ति का आदेश और पुलिस की अपील अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत पीड़िताओं को सहायता राशि प्रदान करने का निर्देश दिया है। फैसले के बाद बलौदाबाजार पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल डायल-112 या स्थानीय थाने में सूचना देने की अपील की है। कानून के प्रावधानों के तहत पीड़िताओं की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी गई है।