बलौदाबाजार। प्रदेश के राजस्व मंत्री के गृह जिले में ही शासकीय जमीनों की हिफाजत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पुटपुरा में 250 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि पर कथित कब्जे को लेकर ग्रामीणों का सब्र जवाब दे चुका है। 5 जून को महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों समेत करीब 150 ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन पर वर्षों से कब्जा जमा हुआ है, लेकिन शिकायतों और आवेदन के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय केवल आश्वासन देते रहे। यही वजह है कि अब मामला गांव की चौपाल से निकलकर जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि कब्जे का विरोध करने वालों को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं। गांव के एक बुजुर्ग को कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, ग्रामीणों का दावा है कि कुछ कथित कब्जाधारी खुलेआम यह कहते फिरते हैं कि पटवारी और तहसीलदार को हम खरीद चुके हैं, तुम लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे।
इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि ग्रामीणों के आरोपों में सच्चाई है तो यह सिर्फ अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था की साख पर भी बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर गांव के विकास, खेल मैदान, सामुदायिक सुविधाओं और भविष्य की सरकारी योजनाओं का आधार तैयार होना चाहिए था, वह आज कथित कब्जों के घेरे में है। लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सीमांकन कर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो 8 जून को कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। गांव में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है।
इस बीच कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने ग्रामीणों को मामले की जांच कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन अब ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्व मंत्री के गृह जिले में सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, विरोध करने वालों को धमकियां और राजस्व अमले पर प्रभाव के दावे सामने आने के बाद प्रशासन कितनी तेजी से हरकत में आता है।
फिलहाल पुटपुरा में गुस्सा उबाल पर है, प्रशासन के पास समय कम है और 8 जून का अल्टीमेटम जिले की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए परीक्षा बनता नजर आ रहा है।