छत्तीसगढ़ के जंगलों से आई सुखद तस्वीर: बारनवापारा के देवपुर में दिखी दुर्लभ ‘जायंट मालाबार स्क्विरल’
बलौदाबाजार/देवपुर -छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। राज्य के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले देवपुर जंगल में बेहद दुर्लभ और आकर्षक ‘जायंट मालाबार स्क्विरल’ (विशालकाय भारतीय गिलहरी) को देखा गया है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए यह खबर छत्तीसगढ़ के जंगलों की सेहत का एक बेहद खास और उत्साहजनक संकेत है।
- विशालकाय कद-काठी: सामान्य गिलहरियों की तुलना में यह काफी बड़ी होती है। इसकी लंबाई करीब 3 फीट तक होती है और इसकी पूंछ शरीर से भी लंबी और घनी होती है।
- आकर्षक रंग: इसके शरीर पर चटक भूरे, काले और गहरे लाल-कत्थई रंग का खूबसूरत कॉम्बिनेशन होता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है।
- शांत माहौल की पहचान: यह गिलहरी स्वभाव से बेहद शर्मीली होती है और केवल उन्हीं जंगलों को अपना बसेरा बनाती है जो पूरी तरह से शांत, सुरक्षित, और घने (स्वस्थ इकोसिस्टम) होते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बारनवापारा क्षेत्र में इस विशाल गिलहरी की मौजूदगी यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों का वातावरण वन्यजीवों के अनुकूल, सुरक्षित और समृद्ध हो रहा है। मानवीय दखल से दूर, देवपुर के जंगलों का यह हिस्सा अब इस दुर्लभ प्रजाति के फलने-फूलने के लिए एक आदर्श ठिकाना बन चुका है।
“करीब 3 फीट लंबी यह आकर्षक विशाल गिलहरी सामान्यतः बेहद शांत और सुरक्षित जंगलों में ही पाई जाती है। इसकी मौजूदगी छत्तीसगढ़ के स्वस्थ और समृद्ध वन्यजीव वातावरण की खूबसूरत तस्वीर पेश करती है।”
इस दुर्लभ गिलहरी की तस्वीरें और खबर सामने आने के बाद से ही पर्यावरण प्रेमियों और वन विभाग में भारी उत्साह है। वन विभाग अब इस क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को और पुख्ता कर रहा है ताकि इस शानदार जीव को एक सुरक्षित और निर्बाध प्राकृतिक आवास मिलता रहे।
यह खोज छत्तीसगढ़ के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के नक्शे पर बारनवापारा को एक नया और गौरवशाली स्थान दिलाएगी।