प्रकृति ही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक, आत्मशुद्धि का उचित माध्यम है शरीर शोधन क्रिया- के. आर. सिन्हा,

BHUPENDRA SINHA

June 19, 2026

सात दिवसीय शरीर शोधन, योग एवं प्राकृतिक उपचार शिविर का व्यापक आयोजन,

छुरा / गरियाबंद :- योग साधक परिवार, पतंजलि योग समिति और माय भारत केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में सात दिवसीय शरीर शोधन, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का वृहद आयोजन किया गया। संपूर्ण प्राकृतिक तरीके से शरीर के विजातीय तत्वों को बाहर निकालकर स्वस्थ रखने हेतु नगर में पहली बार शिविर आयोजित किया गया था। प्रथम दिवस से नियमित योग के द्वारा रोग निवारण के थीम पर सुबह से आंतों की सफाई, कब्ज तोड़ने हेतु सूक्ष्म व्यायाम, आसन, आहारचर्या एवं ज्ञानेन्द्रियों की सफाई हेतु नस्य, जल नेति, नेत्र प्रक्षालन, रबरनेति, सूत नेति, लपेट पद्धति, मिट्टी-पट्टी इत्यादि के द्वारा विभिन्न रोगों से निजात पाने के गुर सिखाए गए। शरीर में सालों से जमी विजातीय तत्व को दूर करने के लिए एनिमा, शंख प्रक्षालन, पाद्ग्भ कांसे के बर्तन से पैरों के तलवों से गंदगी बाहर करना, कुंजल क्रिया द्वारा अमाशय की सफाई की गई। आयुर्वेदरत्न, नाड़ी विशेषज्ञ के.आर. सिन्हा ने शिविर समापन पर आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक है। मानव शरीर में किसी भी बीमारी को ठीक करने और संतुलित करने की प्राकृतिक क्षमता होती है।

मौसमी फलों का समुचित मात्रा में सेवन करना चाहिए। गुरु ग्राम से प्रशिक्षित आहार विशेषज्ञ लोचन देवी ने सात्विक आहारचर्या से स्वास्थ्य लाभ व रोग निदान कराया। निरोगी व रोगी व्यक्ति के दैनिक आहारचर्या पर प्रयोग को मूल रूप में सिखाया गया जिससे शरीर रोगी ना हो और हो भी जाए तो प्राकृतिक क्रियाओं के माध्यम से पुनः निरोगी काया प्राप्त कर सके। शिविर संचालक पुरुषोत्तम चंद्राकर द्वारा कटी-स्नान, भाप- स्नान, रीड्-स्नान द्वारा ब्लड- प्रेशर, अस्थमा, साइटिका, शुगर को नियंत्रित करना सिखाया गया। शिरोधारा के माध्यम से मानसिक विकारों को दूर किया गया। मालिश में विभिन्न तेल व जड़ी बूटी के माध्यम से शरीर के नस-नाड़ियों के अवरोध को दूर किया गया।

आंवलखेड़ा उत्तरप्रदेश से पधारे पंचगव्य, योग चिकित्सा, एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ एवं आयुर्वेद विषारद् सुशील कुमार के द्वारा एक्यूप्रेशर, एक्यूपंचर के माध्यम से शरीर के विभिन्न मर्म बिंदुओं की स्पंदन व दबाव से स्वास्थ्य संबंधी रोग माइग्रेन, घुटना दर्द, पिंडली के दर्द, कमर दर्द, पेट के विकारों को दूर करना, अग्नाशय, हदय, पिल्हा, लिवर ,किडनी ,आंख के शक्ति को जागृत कर रोग निदान के उपाय बताए गए। एक्यूप्रेशर से तुरंत दर्द व रोग से राहत प्रदान किया गया। असाध्य् रोगों पर प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा निवारण करना सिखाया गया एवं विशेष रोगों पर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का उपयोग बताया गया। बलौदाबाजार से स्वास्थ्य लाभ लेने आए शिक्षक छम्मन लाल साहू ने बताया कि सदैव कमजोरी महसूस होते रहता था। शरीर सुस्त एवं चिड़चिड़ापन ज्यादा रहता था किन्तु तृतीय दिवस से ही शरीर में स्फूर्ति आ गई और आनंद की अनुभूति प्राप्त हुआ। शिविरार्थी मीना यादव ने बताया कि वे विगत दस वर्षों से बीपी और शुगर की मरीज है। कई जगहों पर ईलाज कराया किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ।

चौथे दिवस से ही मेरा बीपी और शुगर सामान्य आ गया है और अभी सात दिनों से कोई दवाई भी सेवन नहीं की है। शीला भक्त, रोहित नेताम, घनश्याम सिन्हा, विकास कश्यप, केशव साहू आदि शिविरार्थियों ने प्राकृतिक चिकित्सा के लाभ का अनुभव बताते हुए शिविर की दिनचर्या को बनाए रखने और प्रकृति शक्ति से जुड़ने हेतु प्रेरित किया। सभी शिविरार्थियों के संतुष्टि भरे भावों और खिले हुए चेहरों ने आत्मिक खुशी प्रदान किया। आयोजन समिति अध्यक्ष शंकर लाल यदु ने प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के सभी सदस्यों और शिविरार्थियों का आभार व्यक्त किया। योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी बीमारियों का मूल कारण विजातीय तत्व का जमा होना और गलत जीवनशैली है।

शिविर के सफल आयोजन में हेमलाल पटेल, देवनारायण यदु, संतराम कंवर, नरेन्द्र साहू, ललित साहू, कृष्णेष यादव, जागेश्वर ध्रुव, अर्जुन धनंजय सिन्हा, कोमल यादव, राजकुमार ध्रुव, जानू बघेल, मदन सिंह राजपूत, झम्मन ठाकुर, रेणु चक्रधारी, त्रिवेणी सिन्हा, नमेश्वरी दीवान, बबली यादव का विशेष योगदान रहा।

सह संपादक

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