जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने प्रशासन और PHE विभाग से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग, कई गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल।
महासमुंद/बसना। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच बसना विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर स्थिति को लेकर बसना विधानसभा के सक्रिय कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने आरोप लगाया कि बसना और पिथौरा ब्लॉक के दर्जनों गांवों में पेयजल संकट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों से ग्रामीणों द्वारा पानी की कमी और जलापूर्ति बाधित होने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार, बसना ब्लॉक के परगला, कायतपाली, लमकसा, कलकसा, पिलवापाली, पठियापाली, कुरचुंडी और आमापाली सहित कई गांवों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। वहीं पिथौरा ब्लॉक के माटीदरहा, झगरेनडीह, बोइरडीह, गोदमर्रा, भतकुंदा और पथरला गांवों में भी ग्रामीण पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि कई स्थानों पर शासन की महत्वाकांक्षी नल-जल योजनाओं के तहत पानी टंकियां और अन्य आधारभूत सुविधाएं तो स्थापित कर दी गई हैं, लेकिन अपेक्षित स्तर पर जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई योजनाएं कागजों में संचालित दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो रहा।
उन्होंने बताया कि ग्राम परगला सहित कई गांवों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोगों को दैनिक उपयोग और स्नान जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी पानी जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और जीवन प्रभावित हो रहा है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने पंचायत प्रतिनिधियों, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग और जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए तथा जहां जलापूर्ति योजनाएं बंद या प्रभावित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। साथ ही संकटग्रस्त गांवों में टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा, “पानी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यदि ग्रामीणों को पीने के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। प्रशासन को इस विषय को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए।”
जिला पंचायत सदस्य ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही समस्या की गंभीरता को समझते हुए प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत मिल सके और लोगों को मूलभूत आवश्यकता के लिए परेशान न होना पड़े।
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