बसना में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ किसानों का फूटा गुस्सा, SDM कार्यालय का घेराव, 12 जून तक कार्रवाई का आश्वासन

SARJU PRASAD SAHU

June 8, 2026

बसना। महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों से अधिक कीमत वसूलने के मामले ने अब बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया है। सरकारी दर पर मिलने वाले यूरिया की कथित रूप से दोगुनी कीमत वसूलने के आरोपों के बीच किसानों का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया। कार्रवाई में देरी और अधिकारियों पर लीपापोती के आरोप लगाते हुए किसानों ने बसना SDM कार्यालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया।

किसानों का आरोप है कि विजय कृषि सेवा केंद्र द्वारा 266 रुपये प्रति बोरी की सरकारी यूरिया खाद 540 रुपये में बेची जा रही थी। मामले का वीडियो सामने आने के बावजूद प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा तत्काल कोई कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने से किसानों में नाराजगी बढ़ती गई। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में किसान SDM कार्यालय पहुंचे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

जांच पर उठे सवाल, किसानों ने लगाया संरक्षण देने का आरोप

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों ने पूरे मामले को कमजोर करने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि तैयार किए गए पंचनामे में कालाबाजारी जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख तक नहीं किया गया। किसानों का कहना है कि जब वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं, तब भी न तो दुकान को तत्काल सील किया गया और न ही किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज की गई।

किसानों ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और जिम्मेदार अधिकारियों ने दोषियों को बचाने का प्रयास किया। इससे किसानों में प्रशासन के प्रति अविश्वास और अधिक गहरा गया है।

लाइसेंस बसना का, संचालन बंसुला गांव में

विवाद का एक और बड़ा पहलू सामने आया है। किसानों के अनुसार संबंधित कृषि केंद्र का लाइसेंस बसना शहर के लिए जारी किया गया है, जबकि दुकान का संचालन बंसुला गांव में किया जा रहा है। किसानों का दावा है कि यह उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन है और इस मामले में भी कार्रवाई आवश्यक है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के दबाव और राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई को लगातार टाला जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

कृषि विभाग बैकफुट पर, 12 जून तक कार्रवाई का आश्वासन

किसानों के प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। बसना के कृषि विकास अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि 12 जून तक संबंधित दुकान को सील करने और लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपना धरना समाप्त कर दिया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यदि तय समयसीमा तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे।

किसानों के समर्थन में पहुंचे जनप्रतिनिधि

किसानों के आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिला। राष्ट्रीय किसान परिषद के महामंत्री महेंद्र साव, आम आदमी पार्टी के नेता एवं पार्षद इरफान गीगानी सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और किसानों की मांगों का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की आर्थिक लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच के साथ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

किसानों का बड़ा सवाल

किसानों का कहना है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खाद की कालाबाजारी के आरोपों में घिरे लोगों पर वास्तव में कानूनी कार्रवाई होगी, या फिर केवल लाइसेंस निलंबन जैसी औपचारिक कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर किसानों की नजरें टिकी हुई हैं।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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