बिना अनुमति संचालित भट्ठों से उठ रहे धुएं ने बढ़ाई चिंता
कोरिया। सोनहत क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम जारी है। ग्रामीण इलाकों और सड़क किनारे खेतों में बिना वैधानिक अनुमति के ईंट भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। इन भट्ठों में बड़े पैमाने पर लकड़ी और अवैध कोयले का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों की अनदेखी और सुस्ती के कारण यह अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है।
बिना अनुमति चल रहे भट्ठे
जानकारी के अनुसार किसी भी ईंट भट्ठे के संचालन के लिए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, खनिज विभाग, ग्राम पंचायत और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण मानकों, निर्धारित ऊंचाई की चिमनी, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय स्वीकृति का पालन करना भी जरूरी है।
लेकिन सोनहत क्षेत्र में कई भट्ठे ऐसे हैं जो बिना किसी वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि इन भट्ठों में नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
जंगल कट रहे, हवा हो रही जहरीली
अवैध ईंट भट्ठों में बड़ी मात्रा में लकड़ी जलाए जाने से जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। वहीं कोयले और अन्य ईंधनों के जलने से निकलने वाला धुआं वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सूक्ष्म प्रदूषक कण छोड़ रहा है।
इसका असर आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
राजस्व को भी हो रहा नुकसान
अवैध रूप से संचालित भट्ठों से शासन को मिलने वाली रॉयल्टी, कर और अन्य शुल्क नहीं मिल पा रहे हैं। साथ ही ईंट निर्माण के लिए खेतों और अन्य स्थानों से अवैध मिट्टी खनन किए जाने से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी बड़ा नुकसान होता रहेगा।
क्या कहते हैं नियम
ईंट भट्ठा संचालन के लिए कई नियमों का पालन अनिवार्य है, जिनमें प्रमुख रूप से—
पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति
निर्धारित दूरी पर ही भट्ठे की स्थापना
लकड़ी के बजाय स्वीकृत ईंधन का उपयोग
मिट्टी खनन के लिए वैध अनुमति
श्रमिकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था शामिल हैं।
किन विभागों की जिम्मेदारी
अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, खनिज विभाग, वन विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की होती है। जांच में अनियमितता पाए जाने पर भट्ठा सील करने, जुर्माना लगाने और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
कड़े दंड का भी प्रावधान
विशेषज्ञों के अनुसार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 तथा खनिज नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कारावास तक का प्रावधान है। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध भट्ठों का संचालन जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सोनहत क्षेत्र में संचालित सभी अवैध ईंट भट्ठों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण को होने वाला नुकसान आने वाले समय में गंभीर रूप ले सकता है।