
संडी बंगला। रायपुर-बलौदाबाजार को जोड़ने वाला अति व्यस्त मुख्य मार्ग अब शासन की शराब नीति और जमीनी व्यवस्थाओं के बीच बढ़ते विरोधाभास की तस्वीर पेश कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार नई शराब दुकानें खोल रहा है, लेकिन इन दुकानों के आसपास ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीरता कहीं नजर नहीं आती। नतीजा—संडी जारा रोड जैसे क्षेत्र जाम, दुर्घटना आशंका और सामाजिक असहजता के केंद्र बनते जा रहे हैं।
आय बढ़ाने की नीति, लेकिन जनता पर बढ़ता बोझ
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शासन को शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व की चिंता तो है, लेकिन उन सड़कों की नहीं जहां इन दुकानों के कारण रोज अव्यवस्था फैल रही है। सवाल उठ रहा है कि यदि हर कुछ दूरी पर शराब दुकानें खोली जा रही हैं, तो क्या उनके प्रभावों से निपटने की कोई ठोस योजना भी बनाई गई है।
अति व्यस्त मार्ग पर व्यवस्था क्यों फेल?
रायपुर-बलौदाबाजार मार्ग पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है। ऐसे में जारा रोड स्थित शराब दुकान तक पहुंचने के लिए लोगों का मुख्य सड़क पार करना सीधे दुर्घटना को न्योता देता है। सड़क पार करती भीड़, मुहाने पर बेतरतीब पार्किंग और बढ़ती आवाजाही मुख्य मार्ग की गति रोक रही है।
शासन की कमाई, जनता की परेशानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब दुकानों से सरकारी खजाना भर रहा है, लेकिन आम लोग जाम, जोखिम और सामाजिक असुविधा झेल रहे हैं। रविवार को फिर जारा रोड से मुख्य मार्ग तक लंबा जाम लगा, जिससे राहगीरों, कर्मचारियों और यात्रियों को भारी परेशानी हुई।
छात्राओं, महिलाओं और परिवारों पर असर
इसी मार्ग से रोज स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं, महिला कर्मचारी और ग्रामीण महिलाएं गुजरती हैं। शराब दुकान के आसपास की भीड़ और अव्यवस्थित माहौल को लेकर स्थानीय परिवारों में चिंता बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि शासन को केवल राजस्व नहीं, सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
जनता का सवाल—कमाई पहले या सुरक्षा?
क्षेत्रवासियों ने शासन और प्रशासन से पूछा है कि जब शराब दुकानों का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, तो ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए समान स्तर की तैयारी क्यों नहीं दिखती?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में शराब दुकानों के संचालन और उनके आसपास की व्यवस्थाओं की समीक्षा हो, ताकि जनता को रोजमर्रा की परेशानी और जोखिम से राहत मिल सके।