देवभोग में पोषण आहार की गुणवत्ता पर सवाल: बच्चों का भोजन बना मवेशियों का चारा, मानकों की अनदेखी का आरोप सोयाबीन, मूंगफली और चीनी जैसे आवश्यक तत्वों की कमी, गर्भवती महिलाओं व बच्चों ने खाने से बनाई दूरी

TEKRAM KOSLE

March 23, 2026

रिपोर्टर टेकराम कोसले

देवभोग/गरियाबंद:
राज्य सरकार द्वारा कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे पूरक पोषण आहार योजना पर देवभोग क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप पोषण आहार तैयार नहीं किया जा रहा, जिसके चलते यह आहार बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बजाय मवेशियों के चारे के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों—खासकर देवभोग, मैनपुर और आसपास के दूरस्थ गांवों—में यह स्थिति आम देखने को मिल रही है, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाला पोषण आहार बच्चों की थाली तक नहीं पहुंच पा रहा।
मानकों की अनदेखी का आरोप
जानकारी के अनुसार पूरक पोषण आहार में गेहूं (40 ग्राम), चना (20 ग्राम), चीनी (11 ग्राम), सोयाबीन (9 ग्राम), मूंगफली (9 ग्राम), सोयाबीन तेल (6 ग्राम) और रागी (4 ग्राम) शामिल करने का प्रावधान है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। विशेष रूप से सोयाबीन, मूंगफली और चीनी जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी बताई जा रही है, जिससे आहार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
महिलाओं और बच्चों में अरुचि
गर्भवती, शिशुवती महिलाओं और आंगनबाड़ी के बच्चों ने इस पोषण आहार को खाने में रुचि नहीं दिखाई। उनका कहना है कि आहार का स्वाद और गुणवत्ता दोनों ही खराब हैं।
यही कारण है कि कई जगहों पर यह पोषण आहार मवेशियों को खिलाया जा रहा है, जो सरकारी योजना की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जांच या सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं।
इससे गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अमानक पोषण आहार की आपूर्ति जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग—महिला एवं बाल विकास और बीज निगम—इस पर ध्यान नहीं दे रहे।
पोषण आहार बना व्यापार का साधन
गुणवत्ता खराब होने के कारण कई गांवों में लोग पोषण आहार को बेच भी देते हैं। बताया जा रहा है कि ओडिशा से आने वाले कुछ कोचिया (व्यापारी) इसे सस्ते दाम में खरीदकर ले जाते हैं।
यह मामला पहले भी मीडिया में सुर्खियां बटोर चुका है, लेकिन इसके बावजूद इस अवैध धंधे पर रोक नहीं लग पाई है।
सरकारी मंशा पर पानी
सरकार कुपोषण दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि बच्चों और महिलाओं को पर्याप्त पोषण मिल सके। लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की अनदेखी के कारण यह योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।
शिकायत की तैयारी
ग्रामीणों और हितग्राहियों ने इस मामले की शिकायत विभागीय मंत्री से करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
निष्कर्ष:
देवभोग क्षेत्र में पूरक पोषण आहार की खराब गुणवत्ता न केवल सरकारी योजनाओं की विफलता को उजागर करती है, बल्कि कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को भी कमजोर कर रही है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करें और गुणवत्ता युक्त पोषण आहार सुनिश्चित करें।

सह संपादक

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