
पलारी /भवानीपुर। कभी दूसरों के आंसुओं को अपनी कलम से शब्द देने वाले वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी एवं पूर्व उपसरपंच मुकेश झा अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार 25 मई 2026 को अचानक हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। यह खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली, हर कोई स्तब्ध रह गया। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि हमेशा मुस्कुराते रहने वाला, हर दुख-सुख में साथ खड़ा रहने वाला चेहरा अब कभी दिखाई नहीं देगा।
उनके निधन से ब्राह्मण समाज, पत्रकारिता जगत और पूरे क्षेत्र में गहरा शोक छा गया। पत्रकार साथियों से लेकर शुभचिंतकों तक हर जुबां पर सिर्फ मुकेश झा की बातें थीं। लोग नम आंखों से बस यही कहते नजर आए—“इतनी जल्दी चले जाएंगे, कभी सोचा नहीं था…”
स्वर्गीय मुकेश झा ग्राम पंचायत खपरी की पूर्व सरपंच नवीना झा के ज्येष्ठ पुत्र थे। वे पंच एवं मितानिन प्रीति झा के पति, सर्वेश झा के बड़े भाई तथा तनमय झा एवं भेनु झा के पिता थे।
मंगलवार 26 मई 2026 को सुबह 9 बजे ग्राम खपरी में उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया। पंडित आचार्य राहूल पांडे द्वारा पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया गया। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र तनमय झा ने दी।
जैसे ही बेटे ने कांपते हाथों से पिता को मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हर आंख भर आई। माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया और कई लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो पूरा क्षेत्र अपने किसी बेहद अपने को खो चुका हो।
अंतिम यात्रा में अखंड ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, वरिष्ठ नागरिक, शुभचिंतक एवं बड़ी संख्या में पत्रकार साथी शामिल हुए। हर कोई अपने प्रिय मित्र, साथी और मार्गदर्शक को अंतिम विदाई देने पहुंचा था।
श्रद्धांजलि देते मौजूद लोगों ने कहा कि मुकेश झा केवल पत्रकार नहीं थे, बल्कि समाज की सच्ची आवाज थे। उन्होंने हमेशा गरीब, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को अपनी लेखनी के माध्यम से उठाया। उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता, सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया था।
कड़क मिजाज और बेबाक अंदाज उनकी पहचान जरूर था, लेकिन करीब से जानने वाले कहते हैं कि उनके जैसा घुलमिल जाने वाला इंसान मिलना आसान नहीं। दिल से बेहद नरम मुकेश झा हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। शायद यही वजह थी कि उनकी अंतिम विदाई में लोगों की आंखें बार-बार नम हो उठीं।
पत्रकार साथियों ने भावुक होकर कहा कि “मुकेश झा जैसा इंसान मिलना आसान नहीं होता। वे हर किसी के लिए हमेशा खड़े रहते थे। उनकी मुस्कान, उनका अपनापन और उनका व्यवहार जिंदगीभर याद रहेगा।”
उनके आकस्मिक निधन से पत्रकारिता जगत, ब्राह्मण समाज एवं पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंची है। अंतिम विदाई के समय हर आंख नम थी और हर दिल में सिर्फ एक ही दर्द था—एक अच्छा इंसान आज सबको छोड़कर चला गया।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।