8 जुलाई को छत का सज्जा गिरा, बच्चे बाल-बाल बचे; ग्रामीणों ने सरपंच, पंचायत और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कोरबा। 10 जुलाई 2026 सरकार जहां शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य की बात करती है, वहीं कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बांधाखार के ग्राम जमनीमुड़ा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की जर्जर स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। स्कूल में पढ़ने वाले 53 छात्र-छात्राएं और तीन शिक्षक प्रतिदिन जोखिम के बीच अध्ययन-अध्यापन करने को मजबूर हैं।
8 जुलाई को हुआ बड़ा हादसा टला बताया जा रहा है कि 8 जुलाई 2026 को स्कूल भवन का एक सज्जा (छत का हिस्सा) अचानक भरभराकर गिर गया। संयोगवश उस समय कोई बच्चा उसकी चपेट में नहीं आया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद भी अब तक भवन की मरम्मत अथवा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
बारिश में टपकती छत, दरकती दीवारें बरसात के दौरान स्कूल के कक्षों और मिड-डे मील किचन की छत से लगातार पानी टपकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन की छत क्षतिग्रस्त हो चुकी है और पानी के रिसाव के कारण दीवारों में दरारें आ गई हैं। कई खिड़कियां दबाव के कारण बंद हो चुकी हैं। अस्थायी रूप से छत पर प्लास्टिक शीट डाली गई है, जो तेज हवा में उड़ जाती है। इससे कक्षाओं में पानी भर जाता है और बच्चों की किताबें व कॉपियां भी भीग जाती हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
पंचायत और शिक्षा विभाग पर ग्रामीणों के आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन की मरम्मत के लिए कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि 14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि से पंचायत स्तर पर मरम्मत कार्य किए जाने थे, लेकिन स्कूल को इसका लाभ नहीं मिला।
स्थानीय शिक्षकों का भी कहना है कि जर्जर भवन की जानकारी कई बार संबंधित शिक्षा अधिकारियों को भेजी गई, किंतु अब तक समाधान नहीं निकला। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सरपंच का पक्ष ग्राम पंचायत की सरपंच प्रिंशी तानु सिंह मरावी ने बताया कि स्कूल भवन की समस्या से संबंधित जानकारी लिखित रूप से संबंधित विभागों को भेजी गई है। उनका कहना है कि 8 जुलाई की घटना के बाद भवन की स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। उन्होंने मांग की कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की शीघ्र मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण कराया जाए।
अभिभावकों में चिंता अभिभावकों और ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जर्जर भवन को तत्काल अनुपयोगी घोषित कर सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था तथा नए भवन की स्वीकृति देने की मांग की है।
प्रशासन से उठे तीन सवाल
1. स्कूल भवन की मरम्मत के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग क्यों नहीं हुआ?
2. 8 जुलाई की घटना के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
3. जर्जर भवन के संबंध में प्राप्त शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।