गरियाबंद :- नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर एनएसयूआई द्वारा किए गए प्रदर्शन पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के जिला प्रवक्ता गरियाबंद अक्षत तिवारी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
अक्षत तिवारी ने कहा कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य नीट परीक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव एवं भिलाई नगर विधायक के नेतृत्व में केंद्रीय राज्य मंत्री के निवास का घेराव कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई, लेकिन इसे छात्रों का आंदोलन बताया जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि इस प्रदर्शन में वास्तव में कितने नीट अभ्यर्थी शामिल थे और कितने लोग संगठन के पदाधिकारी एवं राजनीतिक कार्यकर्ता थे।
अक्षत तिवारी ने कहा कि यदि यह वास्तव में छात्रों के अधिकारों की लड़ाई थी, तो आंदोलन में बड़ी संख्या में परीक्षा से प्रभावित छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की उपस्थिति दिखाई देनी चाहिए थी। जनता और विद्यार्थियों को यह जानने का अधिकार है कि आंदोलन में वास्तविक छात्र प्रतिनिधित्व कितना था।
उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं और भविष्य को आधार बनाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं होना चाहिए। शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीति के बजाय समाधान और सुधार की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।
अक्षत तिवारी ने कहा कि अखिल भारत हिन्दू महासभा विद्यार्थियों के हितों के साथ खड़ी है तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही का समर्थन करती है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, लेकिन केवल प्रदर्शन और नारेबाजी से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने मांग की कि एनएसयूआई और आंदोलन के आयोजक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि प्रदर्शन में कितने नीट अभ्यर्थी शामिल थे तथा यह आंदोलन छात्र-नेतृत्व वाला था या संगठन का राजनीतिक कार्यक्रम। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन छात्रों के नाम पर किए जाने वाले किसी भी आंदोलन में छात्रों की वास्तविक भागीदारी और प्रतिनिधित्व भी स्पष्ट होना चाहिए।