पलारी। छत्तीसगढ़ के स्कूलों की प्रार्थना में विभिन्न मंत्रों को शामिल किए जाने के फैसले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस निर्णय पर सवाल उठाए जाने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल पलारी के महामंत्री एवं भाजपा जिला बलौदाबाजार के सोशल मीडिया जिला सहसंयोजक योगेश योगी वर्मा ने तीखा पलटवार किया है। वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त, अनुशासित और संस्कारवान बनाने की दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम है। भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े मंत्र एवं प्रार्थनाएं बच्चों में सकारात्मक सोच, एकाग्रता, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास करती हैं। ऐसे में इसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण के व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने भूपेश बघेल के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें स्कूलों में प्रार्थना के माध्यम से बच्चों पर मंत्र थोपे जाने की बात कही गई थी। वर्मा ने कहा कि कांग्रेस को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन मूल्यों से हमेशा असहजता रही है। जिस पार्टी के नेताओं ने समय-समय पर भगवान श्रीराम की आस्था और अस्तित्व पर प्रश्न खड़े किए, वही आज स्कूलों में प्रार्थना और सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश का विरोध कर रही है।
भाजयुमो नेता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपने कार्यकाल की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था भी याद करनी चाहिए। उनके शासनकाल में सामने आए चर्चित CGPSC भर्ती विवाद सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मामलों ने लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा। ऐसे में युवाओं के भविष्य की रक्षा नहीं कर पाने वाले लोग आज बच्चों को संस्कारों से जोड़ने वाले निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त, आत्मविश्वासी और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना भी है। तीखा कटाक्ष करते हुए योगेश योगी वर्मा ने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में भर्ती घोटाले, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ जैसे मामले सुर्खियों में रहे, उन्हें आज बच्चों की प्रार्थना और संस्कारों की चिंता सताने लगी है। कांग्रेस के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह बच्चों की प्रार्थना जैसे सकारात्मक विषयों पर भी राजनीति करने का प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ की जनता और युवा अब केवल बयानों से नहीं, बल्कि काम और परिणामों से सरकारों का मूल्यांकन कर रहे हैं। स्कूलों में प्रार्थना और प्रेरणादायक मंत्रों का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।