कोरिया। 22 जुलाई 2026 कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गिरजापुर में मनरेगा योजना के तहत बनाई गई पुलिया इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। 13 लाख 76 हजार रुपये की लागत से पांडवपारा-चितवाहीपारा मार्ग पर निर्मित यह पुलिया मात्र एक साल में ही जर्जर हो गई है, जिसने इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी की भ्रष्ट गठजोड़ को उजागर कर दिया है।
पहली बारिश में ही खुल गया भ्रष्टाचार का राज
ग्रामीणों के अनुसार, 28 फरवरी 2025 को पूर्ण हुई इस पुलिया पर जैसे ही पहली बारिश हुई, इसकी सच्चाई सामने आ गई। पुलिया के दोनों ओर मिट्टी का कटाव शुरू हो गया और सीमेंट की परत बहने से अंदर प्रयुक्त पत्थर बाहर दिखने लगे। यह स्थिति साफ करती है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
क्या मानकों की हुई अनदेखी?
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। विशेष रूप से हैंड ब्रोकन स्टोन (हाथ से तोड़ी गई गिट्टी) का उपयोग चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी निरीक्षण प्रभावी ढंग से नहीं हो पाया। यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उस समय निगरानी करने वाले अधिकारी कहाँ थे?
राहगीरों की सुरक्षा पर संकट
पुलिया के दोनों ओर लगातार कटाव होने से सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे आवागमन करने वाले राहगीरों और वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
डीएम के निर्देशों की हवा?
उल्लेखनीय है कि समय-समय पर आयोजित बैठकों में जिलाधिकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए सख्त निर्देश जारी करते हैं, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमर्जी से काम करा रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि निर्देश और कागजों तक ही गुणवत्ता सीमित रह गई है।
ग्रामीणों की मांग: जांच हो, कार्रवाई हो
स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि पुलिया निर्माण की सूक्ष्म एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच ही होती रहेगी और विकास पर डाका डलता रहेगा? या फिर प्रशासन इस बार ठोस कदम उठाएगा?