
रिपोर्टर टेकराम कोसले
महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूलों से करोड़ों रुपये के गबन का मामला अब प्रदेश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराधों में शामिल हो गया है। इस पूरे प्रकरण में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि जिस अधिकारी पर गैस कैप्सूलों की सुरक्षा और सुपुर्दगी की जिम्मेदारी थी, वही इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार निकला।
जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव पर आरोप है कि उसने योजनाबद्ध तरीके से गैस गबन की साजिश रची और अपने सहयोगियों के माध्यम से इसे अंजाम तक पहुंचाया। मामले में अब तक तीन प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
थाना सिंघोडा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान छह एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को पुलिस ने जब्त किया था। इन ट्रकों के नंबर CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663, CG 07 CX 7472, KA 01 AH 4318 और CG 12 BS 4295 बताए गए हैं।
भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों से इन ट्रकों को लंबे समय तक थाना परिसर में रखना जोखिम भरा माना गया। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए पुलिस अधीक्षक महासमुंद ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर सुरक्षित स्थान पर रखने की अनुमति मांगी। इसके बाद जिला प्रशासन ने खाद्य विभाग को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में 30 मार्च 2026 को इन गैस कैप्सूल ट्रकों को रायपुर जिले के उरला स्थित ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स को सुपुर्द कर दिया गया। कागजों में यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिखाई गई, लेकिन बाद में यही सुपुर्दनामा करोड़ों रुपये के गबन की जड़ बन गया।
87 टन गैस गायब, करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि पांच कैप्सूल ट्रकों में भरी लगभग 87 टन एलपीजी गैस का गबन किया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 77 लाख रुपये बताई गई, लेकिन पूरे नेटवर्क और अवैध लेनदेन को मिलाकर मामला करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि गैस को सुरक्षित रखने की बजाय सुनियोजित तरीके से खाली कराया गया और बाद में रिकॉर्ड में हेराफेरी कर पूरे मामले को छिपाने का प्रयास किया गया।
23 मार्च को रची गई साजिश
पुलिस जांच के अनुसार इस पूरे खेल की शुरुआत 23 मार्च 2026 को हुई थी। बताया जा रहा है कि जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच पहली गुप्त बैठक हुई।
यहीं पर करीब एक करोड़ रुपये के गबन की प्रारंभिक योजना बनाई गई। अजय यादव ने पंकज चंद्राकर को ऐसा नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी जो इस खेल को अंजाम तक पहुंचा सके।
इसके बाद रायपुर निवासी मनीष चौधरी को एजेंसियों से संपर्क कर डील फाइनल कराने का जिम्मा सौंपा गया।
सिंघोडा थाना पहुंचकर किया गया गैस का आकलन
26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर खुद सिंघोडा थाना पहुंचे। यहां उन्होंने कैप्सूलों में भरी गैस का अनुमान लगाया। जांच में बताया गया कि छह कैप्सूलों में करीब 105 मीट्रिक टन गैस होने की संभावना जताई गई।
इतनी बड़ी मात्रा देखकर करोड़ों रुपये कमाने की योजना पर अंतिम मुहर लगाई गई। उसी दिन रात में एक गैस एजेंसी संचालक के साथ बैठक की गई, लेकिन उसने इस अवैध काम में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद मनीष चौधरी ने दूसरी एजेंसियों से संपर्क शुरू किया और अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ सौदा तय हुआ। बताया गया कि 80 लाख रुपये में पूरी डील फाइनल हुई थी।
किसे मिला कितना हिस्सा
जांच एजेंसियों के अनुसार पूरे लेनदेन का सबसे बड़ा हिस्सा खाद्य अधिकारी अजय यादव को मिला। आरोप है कि सुपुर्दनामा के अगले ही दिन 31 मार्च को 50 लाख रुपये सीधे उसके घर पहुंचाए गए।
बाकी 30 लाख रुपये की व्यवस्था में देरी होने पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स की ओर से मनीष चौधरी के खाते में 30 लाख रुपये सुरक्षा राशि के रूप में ट्रांसफर किए गए।
बाद में जब रकम की व्यवस्था हो गई तो मनीष चौधरी ने 10 लाख रुपये अपने हिस्से में रखे और 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को दिए। इसके बाद गिरवी रखी गई रकम वापस लौटा दी गई।
फर्जी पंचनामा और रिकॉर्ड में हेराफेरी
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गैस खाली करने के बाद दस्तावेजों में भी बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।
6 और 8 अप्रैल को कैप्सूलों का वजन कराया गया, लेकिन आरोप है कि वजन प्रक्रिया के दौरान वास्तविक गवाह मौजूद ही नहीं थे। बाद में महासमुंद स्थित खाद्य विभाग कार्यालय में एक कथित फर्जी पंचनामा तैयार किया गया।
इस पंचनामा में वही लोग स्वतंत्र गवाह बनाए गए जो पूरी साजिश में शामिल थे। इतना ही नहीं, दस्तावेजों के समय और वजन कांटे के रिकॉर्ड में भी बड़ा अंतर मिला है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कागजों में भी सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की गई।
पुलिस कार्रवाई तेज, और गिरफ्तारियां संभव
मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में—
अजय कुमार यादव
पंकज चंद्राकर
मनीष चौधरी
शामिल हैं।
पुलिस अब बैंक खातों, कॉल डिटेल्स, दस्तावेजों और लेनदेन की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य अधिकारी और कारोबारी भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।