नगरीय निकाय क्षेत्र में आवासहीनों को मिलेगा काबिज भूमि का पट्टा, जल्द शुरू होगा सर्वे

TEJASWI NATH SONI

May 15, 2026

कलेक्टर ने अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक लेकर दिए आवश्यक निर्देश

बलौदाबाजार, 15 मई 2026। राज्य शासन द्वारा नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्तियों को पट्टाधृति अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से “छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार नियम, 2023” लागू किए गए हैं। इन नियमों के तहत जिले के सभी नगरीय निकाय क्षेत्रों में सर्वे कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

इस संबंध में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शुक्रवार को एसडीएम, तहसीलदार एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

📋 15 जून तक पूरा होगा सर्वे

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शासन की मंशा के अनुरूप नगरीय क्षेत्रों में आवासहीन व्यक्तियों को भूमि का पट्टा देने के लिए राजस्व एवं नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारियों को शामिल कर सर्वेक्षण दल गठित किए जाएं। सभी एसडीएम को प्राधिकृत अधिकारी बनाया जाएगा तथा उनके मार्गदर्शन में सर्वे कार्य 15 जून 2026 तक पूरा किया जाएगा, ताकि शासन को 15 अगस्त 2026 तक समेकित रिपोर्ट भेजी जा सके।

🏠 800 वर्गफुट तक मिलेगा पट्टा

बैठक में बताया गया कि जो आवासहीन व्यक्ति 20 अगस्त 2017 से लगातार भूमि पर काबिज हैं, उन्हें अधिकतम 800 वर्गफुट तक भूमि का पट्टा प्रदान किया जाएगा। इससे अधिक भूमि होने पर नियमानुसार राशि जमा कर व्यवस्थापन कराया जाएगा, अन्यथा अतिरिक्त भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी।

📑 पात्रता के लिए आवश्यक शर्तें

पट्टा प्राप्त करने के लिए परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख 50 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है तो वह केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होना चाहिए। एक परिवार को केवल एक ही पट्टा दिया जाएगा।

भूमि कब्जे के सत्यापन हेतु मतदाता सूची, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, जल कर रसीद आदि दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिन हितग्राहियों के मकान बन चुके हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे।

⚖️ नियमों एवं पर्यावरण प्रावधानों का पालन जरूरी

कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सर्वे कार्य “छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार नियम 2023” के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किया जाए। साथ ही वन संरक्षण अधिनियम 1980, जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

सह संपादक

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