राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एम्स रायपुर के पूर्व छात्र डॉ. अविनाश मेहरा ने समाज सेवा और मानवता के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। जहां अधिकांश युवा चिकित्सक बड़े शहरों और कॉर्पोरेट अस्पतालों में करियर बनाना पसंद करते हैं, वहीं डॉ. मेहरा ने छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी जिला नारायणपुर में स्वास्थ्य सेवाएं देने का मार्ग चुना है।
वर्ष 2025 में एम्स रायपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. मेहरा ने शहरी सुविधाओं और आकर्षक करियर विकल्पों को छोड़कर बस्तर संभाग के आदिवासी अंचल में सेवा करने का निर्णय लिया। वर्तमान में वे धनवंतरी जन कल्याण समिति के अंतर्गत मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं और जरूरतमंद लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में जुटे हैं।
राजस्थान के कोटपूतली (जयपुर) के निवासी डॉ. अविनाश मेहरा अपने इस निर्णय का श्रेय राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यरत सामाजिक संगठन ‘सेवांकुर भारत’ को देते हैं। वे पिछले तीन वर्षों से इस संगठन से जुड़े हुए हैं तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रांत संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
डॉ. मेहरा ने नियुक्ति से पहले भी कई जनस्वास्थ्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वर्ष 2025 में जशपुर में आयोजित “वन वीक फॉर नेशन” तथा तेलंगाना के भद्राचलम में आयोजित “थ्री डेज़ फॉर नेशन” अभियान में भाग लेकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपना समर्पण प्रदर्शित किया।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एम्स रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने डॉ. मेहरा को सम्मानित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर का उद्देश्य केवल कुशल चिकित्सक तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील डॉक्टर तैयार करना भी है जो उन क्षेत्रों में सेवा दें, जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता हो।
उन्होंने कहा कि डॉ. अविनाश मेहरा का आदिवासी समाज की सेवा के लिए लिया गया निर्णय देशभर के युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणादायक है और यह एम्स रायपुर के मूल्यों का सच्चा प्रतिबिंब है।
डॉ. अविनाश मेहरा की यह प्रेरक यात्रा यह संदेश देती है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और मानवता की निस्वार्थ सेवा का माध्यम है। बस्तर के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने का उनका प्रयास युवा डॉक्टरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।