छुरा में बिजली संकट गहराया: लो वोल्टेज और कटौती से किसान से व्यापारी तक त्रस्त, 132 केवी सबस्टेशन अब तक अधर में,

BHUPENDRA SINHA

April 25, 2026

छुरा/गरियाबंद:- जिले के छुरा क्षेत्र में इन दिनों बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। लगातार लो वोल्टेज और अनियमित बिजली कटौती से किसान, उपभोक्ता, व्यापारी—हर वर्ग के लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। गर्मी के इस मौसम में हालात और भी बदतर हो गए हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय वोल्टेज इतना कम रहता है कि कूलर और पंखे तक ठीक से नहीं चल पाते। भीषण गर्मी में बिजली की इस स्थिति ने लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों पर असर डाला है। दिन में भी बार-बार बिजली कटौती होने से घरेलू कामकाज और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं, सबसे ज्यादा चिंता किसानों को सता रही है। इस समय रबी फसल पककर तैयार होने की स्थिति में है, लेकिन लो वोल्टेज के कारण बोरवेल और पंप ठीक से नहीं चल पा रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई न होने से फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस समस्या के बीच लोगों में नाराजगी का एक बड़ा कारण पिछले वर्ष की गई घोषणा भी है। मडेली में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छुरा क्षेत्र में बिजली समस्या के स्थायी समाधान के लिए 75 करोड़ रुपये की लागत से 132 केवी सबस्टेशन बनाने की घोषणा की थी। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। इससे क्षेत्रवासियों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के दिनों में बोरवेल और पंपों का उपयोग बढ़ने से लोड अधिक हो जाता है, जिसके कारण लो वोल्टेज और कटौती की समस्या उत्पन्न हो रही है। छुरा के सहायक अभियंता (AE) उमेंद्र दीवान ने बताया कि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मांग के अनुसार आपूर्ति संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया है। 132 केवी सबस्टेशन का निर्माण कार्य शुरू न होना भी प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े कर रहा है।

अब देखने वाली बात होगी कि शासन और प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक प्राथमिकता में लेकर इसका ठोस समाधान करते हैं, ताकि छुरा क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और किसानों की मेहनत पर संकट न आए।

सह संपादक

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