87 टन एलपीजी गबन मामले में बड़ी कार्रवाई, कोल्हापुर के होटल में छिपे मिले मुख्य आरोपी

SARJU PRASAD SAHU

May 28, 2026

एलपीजी गबन कांड : ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक-पुत्र महाराष्ट्र से गिरफ्तार, जांच में खाद्य विभाग के अफसर समेत कई चेहरों की मिलीभगत उजागर

महासमुंद। जिले में सामने आए बहुचर्चित एलपीजी गबन कांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर छत्तीसगढ़ पहुंचाया है।

जांच में अब तक हुए खुलासों ने पूरे मामले को केवल आपराधिक न्यास भंग तक सीमित न रखकर संगठित षड्यंत्र, सरकारी तंत्र की मिलीभगत और बड़े पैमाने पर कालाबाजारी से जोड़ दिया है। पुलिस के अनुसार खाद्य विभाग के अधिकारी, निजी कारोबारी और बिचौलियों के गठजोड़ के जरिए जब्त एलपीजी गैस को अवैध रूप से बेच दिया गया।

पर्दे के पीछे खाद्य अधिकारी, सामने डील मेकर

पुलिस जांच में सामने आया है कि खाद्य अधिकारी अजय यादव पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार था। वहीं पंकज चंद्राकर को गबन का “डील मेकर” बताया जा रहा है। मामले में मनीष चौधरी ने विभिन्न एजेंसियों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाई।

सूत्रों के अनुसार शुरुआत में पूरे मामले को दबाने और सेटिंग करने के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग की गई थी। करीब एक सप्ताह तक मोलभाव चलता रहा और आखिरकार 90 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।

11 शहरों के टावर डंप और सीडीआर से मिला सुराग

मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और उसका पुत्र लगातार ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बदले ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके।

जांच टीम ने 11 शहरों के टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टोल प्लाजा डाटा, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके बाद पुलिस ने रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर समेत कई स्थानों पर दबिश दी।

अंततः दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे मिले, जहां स्थानीय पुलिस की मदद से उन्हें गिरफ्तार किया गया।

19 मार्च से शुरू हो गई थी पूरी साजिश

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि एलपीजी गबन की साजिश सुपुर्दनामा होने के 11 दिन पहले यानी 19 मार्च 2026 से ही शुरू हो चुकी थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक योजना के तहत कैप्सूल ट्रकों का तत्काल वजन नहीं कराया गया और जल्दबाजी में सभी टैंकर खाली करा दिए गए। इसके बाद 6 से 8 अप्रैल के बीच ट्रकों का वजन कराया गया।

आरोप है कि फर्जी तौल पंचनामा तैयार किया गया और उसी षड्यंत्र में शामिल लोगों को पंचनामा का गवाह बनाया गया। खाद्य विभाग कार्यालय स्थित तौल कांटे में कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हस्ताक्षर करवाए गए।

40 टन खरीदी, 135 टन बिक्रीजांच में यह भी सामने आया है कि अप्रैल महीने में केवल 40 टन एलपीजी खरीदी गई थी, जबकि 135 टन एलपीजी बेचे जाने के दस्तावेज मिले हैं।

गबन की गई गैस को लगभग 20 अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बिना जीएसटी और कच्चे बिलों के जरिए मनमाने दामों पर बेचा गया। पुलिस इसे आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर की गई संगठित कालाबाजारी मान रही है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल थाना सिंघोडा क्षेत्र में अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 24 दिसंबर 2025 को 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों से इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन ने खाद्य विभाग को जिम्मेदारी दी थी।

इसके बाद 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ये ट्रक ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स, उरला (रायपुर) के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द किए गए।

जांच में सामने आया कि सुपुर्दगी में दिए गए ट्रकों में मौजूद करीब 87 टन एलपीजी गैस, जिसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपये बताई गई है, का गबन कर लिया गया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। जांच के दौरान आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना, सरकारी संपत्ति की हेराफेरी और कालाबाजारी के साक्ष्य मिलने पर अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी गईं।

अब तक गिरफ्तार आरोपी

हालिया गिरफ्तार आरोपी,संतोष सिंह ठाकुर,सार्थक सिंह ठाकुर

पूर्व में गिरफ्तार आरोपी

निखिल वैष्णव,पंकज चंद्राकर,मनीष चौधरी,अजय कुमार यादव

जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे

पुलिस का कहना है कि मामले में अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई नए नाम सामने आ सकते हैं। वित्तीय लेनदेन, गैस सप्लाई चैन और विभागीय भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।

संभावना जताई जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य कारोबारी, एजेंसियां और विभागीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

संपादक { विज्ञापन‍ }

Share this content:

Leave a Comment