देवभोग। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य सरकारी आवास योजनाओं के तहत दूसरी किस्त की राशि समय पर जारी नहीं होने से गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र के सैकड़ों हितग्राही गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पहली किस्त मिलने के बाद लाभार्थियों ने पुराने कच्चे मकानों को तोड़कर नए मकानों का निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन दूसरी किस्त नहीं मिलने से अधिकांश मकान अधूरे पड़े हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के सामने सिर छुपाने तक का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहली किस्त मिलने के बाद उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्माण कार्य शुरू किया और कई हितग्राहियों ने अपने मकानों को चौखट लेवल तक तैयार भी कर लिया। इसके बावजूद दूसरी किस्त जारी नहीं होने से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है।
मानसून के मौसम में अधूरे मकानों के कारण सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। कई परिवार तिरपाल के सहारे रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों या किराए के मकानों में शरण लेकर दिन गुजार रहे हैं। बारिश के बीच रहने की यह मजबूरी उनके लिए लगातार चिंता का कारण बनी हुई है।
आर्थिक संकट भी लगातार गहराता जा रहा है। निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की उम्मीद में कई हितग्राहियों ने स्थानीय साहूकारों और रिश्तेदारों से उधार लेकर निर्माण सामग्री खरीदी। इतना ही नहीं, कई किसानों ने खरीफ फसल की बुवाई के लिए रखी गई राशि भी मकान निर्माण में लगा दी। अब दूसरी किस्त नहीं मिलने से वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और खेती-किसानी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
परेशान हितग्राही लगातार जनपद पंचायत देवभोग और संबंधित सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि हर बार उन्हें केवल “राशि जल्द जारी होगी” कहकर आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक दूसरी किस्त उनके खातों में नहीं पहुंची है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि लंबित दूसरी किस्त की राशि शीघ्र जारी की जाए ताकि अधूरे पड़े मकानों का निर्माण पूरा हो सके और गरीब परिवारों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
अब देखना यह होगा कि समाचार प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और हितग्राहियों को राहत दिलाने के लिए लंबित राशि कब तक जारी की जाती है, या फिर गरीब परिवारों को एक बार फिर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ेगा।