27.894 किलो गांजा बरामदगी के NDPS मामले में सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को जमानत* *व्यक्तिगत तलाशी में नहीं मिला था कोई मादक पदार्थ, घर से लगे भाठा भूमि के गड्ढे से हुई थी बरामदगी; अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी*

BIRENDRA KUMAR SEN

September 22, 2026

*27.894 किलो गांजा बरामदगी के NDPS मामले में सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को जमानत*
*व्यक्तिगत तलाशी में नहीं मिला था कोई मादक पदार्थ, घर से लगे भाठा भूमि के गड्ढे से हुई थी बरामदगी; अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी*

नई दिल्ली/रायपुर। नारको साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज एक्ट (NDPS Act) से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ निवासी आरोपी मोहन सिंह कोशले उर्फ राकेश को जमानत का लाभ प्रदान किया है। मामले में आरोपी की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने अपने अन्य साथी अधिवक्ताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। *सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 18 सितंबर 2026 को पारित आदेश में आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।*
यह मामला Criminal Appeal No. 4440 of 2026, @ SLP (Crl.) No. 17846/2026, @ Diary No. 24828/2026 – Mohan Singh Koshley @ Rakesh versus State of Chhattisgarh से संबंधित है। आदेश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ द्वारा पारित किया गया।
व्यक्तिगत तलाशी में नहीं मिला था गांजा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अभियोजन का मामला यह था कि आरोपी को 20 मई 2025 को उसके घर के पास पकड़ा गया था। आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी के दौरान कोई प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी के घर से लगी भाठा भूमि में स्थित एक गड्ढे से दो बोरियों में कुल 27.894 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने का दावा किया गया।
इसी बरामदगी के आधार पर आरोपी के विरुद्ध NDPS Act की धारा 20(b) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
अभियोजन ने मेमो कथन को बनाया था आधार
मामले में अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी ने एक मेमोरेण्डम/कथित कथन में बताया था कि फरार सह-आरोपी राकेश वर्मा ने उसे 50 किलोग्राम गांजा रखने के लिए दिया था। अभियोजन के अनुसार, उसमें से लगभग 27 किलोग्राम गांजा आरोपी के पास रह गया था और उसे इस सामान को सुरक्षित रखने के लिए 5,000 रुपये दिए गए थे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले में बरामदगी की प्रकृति तथा आरोपी के साथ बरामद मादक पदार्थ के संबंध से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।


19 में से 10 गवाहों के बयान हुए, चार गवाह मुकर चुके थे
आदेश में यह भी दर्ज है कि जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट प्रस्तुत की जा चुकी थी और मुकदमे की सुनवाई प्रारंभ हो गई थी। उस समय तक अभियोजन के 19 में से 10 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके थे।
महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि चार गवाह, जिनमें पंच गवाह भी शामिल था, अभियोजन के समर्थन में नहीं रहे और hostile हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इन परिस्थितियों को जमानत के प्रश्न पर विचार करते समय रिकॉर्ड पर लिया।
धारा 37 NDPS Act की लागू होने की स्थिति भी विचारण का विषय
मामले में NDPS Act की धारा 37 की कठोर जमानत शर्तें लागू होने का प्रश्न भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि धारा 37 लागू होती है अथवा नहीं, यह प्रश्न विचारण के दौरान परीक्षण किया जाना होगा।
पीठ ने विशेष रूप से इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना कि कथित मादक पदार्थ आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद नहीं हुआ था।
इसके साथ ही यह प्रश्न भी विचारणीय बताया गया कि जिस स्थान से गांजा बरामद किया गया, क्या वह स्थान आरोपी के विशेष/एकमात्र स्वामित्व और कब्जे में था तथा क्या आरोपी उस मादक पदार्थ के सचेत कब्जे (conscious possession) में था।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा—इन प्रश्नों का परीक्षण ट्रायल में होगा
आदेश में दर्ज परिस्थितियों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर आरोपी को जमानत का हकदार माना। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि बरामदगी वाले स्थान पर आरोपी का विशिष्ट कब्जा, मादक पदार्थ पर उसका नियंत्रण तथा conscious possession जैसे प्रश्नों का अंतिम निर्धारण विचारण के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए पूर्व आदेश को निरस्त किया और आरोपी को संबंधित ज्यूरिडिक्शनल सेशंस कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों एवं नियमों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
आरोपी मोहन सिंह कोशले उर्फ राकेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने अपने साथी अधिवक्ताओं के साथ पैरवी की। रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अविनाश दुबे, अधिवक्ता हरि अभिषेक पी., अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी तथा एओआर श्री सोमनाथ पाढ़न उपस्थित रहे।
राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल ऋषभ साहू, एओआर अपूर्व शुक्ला, अधिवक्ता प्रह्लीन ए. शुक्ला तथा अधिवक्ता इलाश्री गौड़ उपस्थित थीं।
NDPS मामलों में कब्जे और सचेत कब्जे का प्रश्न महत्वपूर्ण
इस मामले का आदेश NDPS मामलों में उस स्थिति को रेखांकित करता है, जहां कथित प्रतिबंधित पदार्थ आरोपी के शरीर या व्यक्तिगत कब्जे से सीधे बरामद नहीं होता, बल्कि किसी अन्य स्थान से बरामद किया जाता है। ऐसे मामलों में बरामदगी वाले स्थान पर आरोपी का वास्तविक नियंत्रण, कब्जा और मादक पदार्थ के संबंध में उसका ज्ञान जैसे तथ्य साक्ष्य के मूल्यांकन का हिस्सा बनते हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का अर्थ आरोपी को मामले से दोषमुक्त किया जाना नहीं है। न्यायालय ने केवल जमानत के स्तर पर उपलब्ध परिस्थितियों का मूल्यांकन किया है, जबकि आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्णय संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।
आदेश दिनांक : 18 सितंबर 2026
प्रकरण : Mohan Singh Koshley @ Rakesh बनाम State of Chhattisgarh
Criminal Appeal No. 4440 of 2026
पीठ : न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली
पक्षकार की ओर से अधिवक्ता : देवप्रसाद जोशी एवं अन्य मोबाइल नंबर 9893354327

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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