सिवानिकला में सीएचओ धनेश्वरी ध्रुव की पहल बनी चर्चा का विषय; आरएचओ-मितानिनों की टीम के साथ चौखट तक पहुंच रही स्वास्थ्य जागरूकता
बागबाहरा/कोमाखान।
अस्पताल तक मरीज पहुंचे, इसका इंतजार क्यों… जब सेहत की बात है तो स्वास्थ्य टीम ही गांव की चौखट तक पहुंचे। इसी सोच के साथ बागबाहरा ब्लॉक के छोटे से गांव सिवानिकला (कोमाखान)में स्वास्थ्य जागरूकता की अनूठी पहल चल रही है। यहां संचालित आरोग्य आयुष्मान मंदिर की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) धनेश्वरी ध्रुवआरएचओ और क्षेत्र की मितानिनों को साथ लेकर घर-घर पहुंच रही हैं।
टीम ग्रामीणों को सिर्फ टीबी से बचाव की जानकारी ही नहीं दे रही, बल्कि बीमारी के लक्षण पहचानने, समय पर जांच कराने, उपचार लेने और मौसमी बीमारियों से खुद व परिवार को सुरक्षित रखने के तरीके भी बता रही है। खंड चिकित्सा अधिकारियों के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान का मकसद साफ है—बीमारी को बढ़ने से पहले रोकना और गांव को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना।
महिलाओं ने खोला मन, बच्चों की सेहत पर भी हुई बात
अभियान की खास बात यह है कि स्वास्थ्य टीम ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सीधे संवाद कर रही है। महिलाओं से उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पूछी जा रही हैं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी जरूरी जानकारी दी जा रही है। तस्वीरों में स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण महिलाओं से चर्चा करते और स्वास्थ्य संबंधी सामग्री के माध्यम से उन्हें समझाते नजर आ रहे हैं। एक मां अपने नन्हे बच्चे को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों से जानकारी लेती दिख रही है।
यह दृश्य बताता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा जब कागजों से निकलकर गांव की चौखट तक पहुंचती है, तो लोगों का भरोसा भी बढ़ता है।
टीबी मुक्त गांव… फिर टीबी मुक्त भारत
स्वास्थ्य टीम ग्रामीणों को टीबी के प्रति जागरूक करते हुए यह संदेश दे रही है कि बीमारी को छिपाने के बजाय उसके लक्षण नजर आने पर समय पर जांच और उपचार कराना जरूरी है। अभियान के माध्यम से “टीबी मुक्त गांव, टीबी मुक्त भारत” का संकल्प भी ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है।
छोटे गांव से बड़ा संदेश
सिवानिकला में चल रही यह मुहिम भले ही छोटे स्तर पर दिखाई दे, लेकिन इसका संदेश बड़ा है। सीएचओ धनेश्वरी ध्रुव की सक्रियता से स्वास्थ्य टीम लगातार ग्रामीणों के बीच पहुंच रही है। ग्रामीण भी इस प्रयास की सराहना करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति प्रसन्नता जता रहे हैं।
गांव वालों के लिए यह सिर्फ जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि उनके बीच पहुंचकर उनकी सेहत की चिंता करने वाली पहल बन गई है। यही वजह है कि सिवानिकला में स्वास्थ्य टीम की दस्तक अब लोगों के लिए भरोसे की दस्तक बनती जा रही है।