कोरबा। 21 जुलाई 2026 ऊर्जाधानी कोरबा की जीवनदायिनी हसदेव नदी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि CSEB पश्चिम दर्री स्थित राखड़ डैम से बिना उपचार के राखड़ युक्त प्रदूषित पानी सीधे हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है, कृषि भूमि प्रभावित हो रही है और आसपास के गांवों में रहने वाले लोग त्वचा संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार झाबू ग्राम की अधिग्रहित भूमि पर बने इस राखड़ डैम की देखरेख CSEB कर्मचारी मनोज मारकंडे द्वारा की जाती है। उनका आरोप है कि राखड़ युक्त पानी के शोधन के लिए करोड़ों रुपये की लागत से संयंत्र स्थापित किया गया, लेकिन उसका नियमित उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र से पानी शुद्ध करने के बजाय डैम के किनारे बनी नाली के माध्यम से राखड़ मिला पानी सीधे बाहर बहा दिया जाता है।
‘राखड़ छानने की व्यवस्था भी हटाई गई’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डैम के भीतर राखड़ को छानने के लिए लगाई गई छन्नीदार कनात भी हटा दी गई है। नियमों के अनुसार छनित पानी ही बाहर छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में बिना छना राखड़ युक्त पानी लगातार हसदेव नदी में प्रवाहित हो रहा है।
हसदेव बांध की क्षमता पर भी खतरा
ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों का कहना है कि लगातार राखड़ बहने से हसदेव दर्री बांध में सिल्ट और राख की मात्रा बढ़ रही है, जिससे बांध की जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
खेत प्रभावित, ग्रामीणों में बीमारी की शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि राखड़ युक्त पानी के कारण आसपास के खेतों की उपजाऊ क्षमता कम हो रही है। साथ ही इसी पानी का उपयोग दैनिक कार्यों में करने से लोगों में खुजली, चर्म रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच कराने की मांग की है।
जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान शोधन संयंत्रों की वास्तविक स्थिति की जांच नहीं की जाती और केवल दस्तावेजों के आधार पर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
– राखड़ डैम से बिना उपचार के प्रदूषित पानी का बहाव तत्काल रोका जाए।
– शोधन संयंत्रों को नियमित रूप से संचालित कर वैज्ञानिक तरीके से राखड़ का निपटान किया जाए।
– हसदेव नदी और दर्री बांध की सफाई कराई जाए।
– मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
– प्रभावित ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उचित मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे सर्व पत्रकार एकता महासंघ के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।
हालांकि, इस मामले में CSEB प्रशासन और पर्यावरण विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।