महिला एवं बाल पोषण, स्वास्थ्य और जागरूकता को लेकर ग्रामीणों की रही सहभागिता
बेरला। पोषण माह के अंतर्गत ग्राम पत्थरपूंजी में ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य तथा विभागीय योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आंगनबाड़ी केंद्रों से समुदाय की सहभागिता को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा महिला एवं बाल विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती आरती बारले रहीं। उनके साथ उपसरपंच गोपी मनहरे, भाजपा नेता नारायण पटेल, रमेश मनहरे, छोटकु मनहरे, सामाजिक कार्यकर्ता खोमेश्वर, भाजपा नेता रज्जू मानिकपुरी, पंच शिव देशलहरे, पंचायत सचिव दिनेश निषाद एवं पूर्व सरपंच लक्ष्मी नारायण सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर शिक्षकों की भी सहभागिता रही। शिक्षक कवल प्रसाद, गौकरण जांगड़े एवं डेंच चेलक ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गायत्री निषाद, गीता साहू एवं देव प्रसाद ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य कार्यकर्ता राम बाई साहू उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सहायिकाओं सत्या डेहरे, चितरेखा चेलक एवं कांति मनहरे तथा मितानिन बिमला, उर्वशी निषाद, पार्वती साहू एवं आरती बंजारे की भी सहभागिता रही। पर्यवेक्षक सोनिका टंडन एवं कृषि सखी ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर ग्रामीणों के साथ सहभागिता की।
‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल बच्चों की देखभाल और पोषण तक सीमित न रखते हुए समुदाय से जोड़ने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए संतुलित आहार तथा परिवार में पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ने तथा उपलब्ध विभागीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही परिवार और समुदाय की सहभागिता से कुपोषण की स्थिति में सुधार लाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।
आयोजन में समस्त ग्रामवासियों की सहभागिता रही। जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मितानिनों, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों एवं ग्रामीणों की मौजूदगी से कार्यक्रम सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण बना।
