
रिपोर्टर टेकराम कोसले
कसडोल/बलौदाबाजार, 29 सितंबर 2026।
मानव सेवा और परोपकार की भावना का अनुकरणीय उदाहरण सामने आया है। बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुम्हारी निवासी 56 वर्षीय दुलारा बाई पटेल, पत्नी रामनारायण पटेल ने निधन के बाद अपनी देह चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा के लिए दान की। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रेरित होकर लिए गए देहदान के संकल्प के तहत उनकी पार्थिव देह को सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बिलासपुर (SIMS Bilaspur) को सौंपा गया।
दुलारा बाई पटेल के इस निर्णय को परिवार और समाज में देहदान एवं मानव सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। देहदान के माध्यम से चिकित्सा विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने में सहायता मिलती है।
संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से मिली देहदान की प्रेरणा
परिजनों के अनुसार, दुलारा बाई पटेल संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रेरित थीं और मानव सेवा तथा परोपकार को महत्वपूर्ण मानती थीं। इसी भावना के चलते उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी देह चिकित्सा शिक्षा के लिए दान करने का संकल्प लिया था।
उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए परिवार के सदस्यों ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग किया और उनकी पार्थिव देह को चिकित्सा संस्थान को सौंपा गया।
SIMS बिलासपुर को सौंपी गई पार्थिव देह
29 सितंबर 2026 को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद दुलारा बाई पटेल की पार्थिव देह सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बिलासपुर को सौंपी गई।
चिकित्सा शिक्षा में देहदान का विशेष महत्व माना जाता है। मानव शरीर की संरचना को समझने के लिए मेडिकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक अध्ययन की आवश्यकता होती है। दान की गई देह चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में उपयोगी हो सकती है।
परिवार ने किया इच्छा का सम्मान
दुलारा बाई पटेल के देहदान के निर्णय को पूरा कराने में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रिया में सहयोग किया।
ऐसे मामलों से समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मृत्यु के बाद भी मानव सेवा में योगदान देने की भावना को प्रोत्साहन मिल सकता है।
देहदान से चिकित्सा शिक्षा को मिलती है सहायता
देहदान केवल एक व्यक्ति के अंतिम निर्णय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका संबंध चिकित्सा शिक्षा से भी है। मेडिकल विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना का अध्ययन करके अपने चिकित्सा ज्ञान को व्यावहारिक रूप से मजबूत करते हैं।
इसी दृष्टि से दुलारा बाई पटेल का देहदान मानव सेवा, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी पहल के रूप में सामने आया है।
संत रामपाल जी महाराज से जुड़े सेवा कार्यों का उल्लेख
परिजनों एवं समर्थकों के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रेरित होकर उनके अनुयायियों द्वारा विभिन्न प्रकार के सामाजिक एवं मानव सेवा कार्य किए जाते हैं। इनमें देहदान, रक्तदान, दहेज मुक्त विवाह, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य सेवा गतिविधियों का उल्लेख किया जाता है।
दुलारा बाई पटेल का देहदान भी उनके परिवार द्वारा इसी सेवा एवं परोपकार की भावना से जुड़ा निर्णय बताया गया है।
ग्राम कुम्हारी के लिए भी संदेश
कसडोल ब्लॉक के ग्राम कुम्हारी निवासी दुलारा बाई पटेल के देहदान से स्थानीय स्तर पर भी देहदान के महत्व को लेकर चर्चा और जागरूकता बढ़ने की संभावना है। उनका निर्णय इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि व्यक्ति मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में योगदान दे सकता है।
परिवार की ओर से उनकी इच्छा को पूरा किया जाना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
दुलारा बाई पटेल के देहदान से जुड़ी प्रमुख जानकारी
विवरण
जानकारी
नाम
दुलारा बाई पटेल
उम्र
56 वर्ष
पति
रामनारायण पटेल
ग्राम
कुम्हारी
विकासखंड
कसडोल
जिला
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
देहदान स्थल
सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बिलासपुर
दिनांक
29 सितंबर 2026
निष्कर्ष
दुलारा बाई पटेल का देहदान मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के प्रति समर्पण का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। परिवार के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रेरित होकर उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था, जिसे उनके निधन के बाद परिवार ने पूरा कराया। उनकी पार्थिव देह SIMS बिलासपुर को सौंपे जाने से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में इसका उपयोग किया जा सकेगा।