​जिला बलौदाबाजार यातायात जागरूकता अभियान: स्कूली छात्र-छात्राओं को पढ़ाया गया यातायात नियमों का ‘सुरक्षा पाठ’

BIRENDRA KUMAR SEN

July 28, 2026

Opजिला बलौदाबाजार यातायात जागरूकता अभियान: स्कूली छात्र-छात्राओं को पढ़ाया गया यातायात नियमों का ‘सुरक्षा पाठ’

  • जिले के प्रत्येक स्कूल में प्राथमिकता से दी जा रही ट्रैफ़िक रूल्स की जानकारी
  • रोहरा, हथबंद एवं कसडोल के स्कूलों में हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम
  • अभियान के तहत अब तक 1800 से अधिक छात्र-छात्राएं हुए लाभान्वित

बलौदाबाजार / रायपुर:

​बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और आमजन में यातायात के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से जिले भर में विशेष ‘यातायात जागरूकता अभियान’ चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिला प्रशासन एवं पुलिस/यातायात विभाग की संयुक्त पहल से जिले के प्रत्येक स्कूल में छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों का व्यावहारिक एवं सुरक्षात्मक ‘पाठ’ पढ़ाया जा रहा है।

​इसी कड़ी में हाल ही में रोहरा, हथबंद एवं कसडोल क्षेत्र के विभिन्न शासकीय एवं निजी स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक संकेतों और जिम्मेदार नागरिक बनने के गुर सिखाए गए।

​विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस सतत अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक 1,800 से अधिक छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि स्कूली स्तर पर ही बच्चों में यातायात नियमों के प्रति समझ पैदा की जाए, तो वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने परिजनों को भी जागरूक करेंगे।

​रोहरा, हथबंद और कसडोल के स्कूलों में आयोजित इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञों एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा विद्यार्थियों को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी दी गई:

  • हेलमेट और सीटबेल्ट का महत्व: दोपहिया वाहन चलाते समय गुणवत्तापूर्ण हेलमेट पहनने तथा चार पहिया वाहन में सीटबेल्ट लगाने की अनिवार्यता समझाई गई।
  • सड़क संकेत एवं सिग्नल: रेड, येलो और ग्रीन सिग्नल के अर्थ तथा विभिन्न रोड साइन्स (यातायात संकेतों) के बारे में विस्तार से बताया गया।
  • नाबालिगों द्वारा वाहन चालन पर रोक: 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा वाहन न चलाने की सख्त सलाह दी गई और इसके कानूनी व सुरक्षात्मक पहलुओं से अवगत कराया गया।
  • ओवरस्पीडिंग और मोबाइल का प्रयोग: वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने, स्टंट करने और निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज़ चलाने के गंभीर परिणामों से आगाह किया गया।

​आयोजन के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि स्कूली बच्चे समाज में सकारात्मक बदलाव के सबसे बड़े संवाहक होते हैं। जब एक बच्चा सड़क सुरक्षा के नियमों को सीखता है, तो वह घर जाकर अपने माता-पिता और आसपास के लोगों को भी हेलमेट पहनने और नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।

​स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों ने इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के व्यावहारिक पाठ बच्चों के भविष्य और जीवन रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आगामी दिनों में जिले के अन्य सभी सुदूर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में भी यह अभियान चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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