बसना/महासमुंद। खरीफ सीजन के बीच डीएपी और यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों को हो रही परेशानी को लेकर बसना विधानसभा के सक्रिय कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने प्रशासन और कृषि विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए निर्धारित खाद की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है, जबकि प्रशासन इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि सहकारी समितियों और सरकारी खाद वितरण केंद्रों पर किसान घंटों लाइन लगाने के बावजूद खाली हाथ लौट रहे हैं, जबकि निजी बाजार में डीएपी और यूरिया आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी केंद्रों पर खाद का अभाव है, तो निजी दुकानों तक बड़ी मात्रा में खाद कैसे पहुंच रही है। उन्होंने इसे गंभीर जांच का विषय बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को मजबूरी में निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते नियमित निरीक्षण करता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता, तो कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती थी। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
मोक्ष कुमार प्रधान ने प्रशासन से सभी सहकारी समितियों और खाद विक्रय केंद्रों का विशेष निरीक्षण कराने, खाद के स्टॉक और वितरण का सार्वजनिक ब्यौरा जारी करने तथा किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ किसानों के हित में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।