
वरिष्ठ पत्रकार शिखा दास की रिपोर्ट
महासमुंद/पिथौरा। तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत लहरौद में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक संवेदनशील घटना सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 45 वर्षों से शासकीय भूमि पर निवासरत पांच परिवारों के मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई के दौरान 13 वर्षीय बालिका मालती निषाद (पिता योगेश निषाद) ने कथित रूप से कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। बालिका को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार मोहित कुमार अमिला के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला और पुलिस बल बेदखली कार्रवाई के लिए गांव पहुंचा था। इसी दौरान बालिका ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई, लेकिन जब उसकी बात नहीं सुनी गई तो उसने कीटनाशक पी लिया। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद प्रशासनिक अमला मौके से चला गया और चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था नहीं की गई।
पीड़ित परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पिछले लगभग 45 वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं तथा वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके पक्के मकान भी बनाए गए थे। उनका आरोप है कि भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद प्रशासन ने अचानक कार्रवाई की।

ग्रामीणों के अनुसार, परिवारों को तहसील कार्यालय में पेशी के नाम पर बुलाया गया था और इसी दौरान बुलडोजर लेकर टीम उनके घरों पर पहुंच गई। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के हित में यह कार्रवाई की गई है।
प्रशासन का पक्ष
तहसील प्रशासन के अनुसार ग्राम लहरौद स्थित खसरा नंबर 896 एवं 897 की शासकीय भूमि पर बेदखली आदेश का पालन नहीं होने के कारण शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई। तहसीलदार मोहित कुमार अमिला ने कहा कि बेदखली आदेश के तहत कार्रवाई की गई है तथा उन्हें बालिका द्वारा कीटनाशक पीने की जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी
ग्राम पंचायत लहरौद के उपसरपंच रमेश सिन्हा ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत को पूर्व सूचना नहीं दी गई और बिना पर्याप्त जानकारी के अचानक कार्रवाई की गई।
वरिष्ठ पत्रकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिखा दास का बयान
इंटरनेशनल अवार्ड प्राप्त मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार शिखा दास ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत को सूचना दिए बिना कार्रवाई करना तथा एक मासूम बालिका की गुहार के बावजूद संवेदनहीन रवैया अपनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अमानवीय व्यवहार सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के ठीक पहले गरीब परिवारों के आशियाने तोड़ना सामाजिक संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं माना जा सकता। शिखा दास ने प्रशासन से पारदर्शी जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा पीड़ित परिवारों को उचित राहत उपलब्ध कराने की मांग की।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने न्यायालय में विचाराधीन भूमि विवाद, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित मकानों तथा बालिका के आत्महत्या प्रयास की घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।

समाजसेवी एवं पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ठाकुर अनंत सिंह वर्मा ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि संबंधित भूमि पर कोई अत्यावश्यक शासकीय निर्माण कार्य प्रस्तावित नहीं था, तो बरसात के ठीक पहले गरीब परिवारों के आशियाने पर बुलडोजर चलाना पूरी तरह अनुचित और अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से निवासरत परिवारों को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया, जिसके कारण भय और मानसिक तनाव में आकर 13 वर्षीय बालिका ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया।
ठाकुर वर्मा ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या संवेदनहीनता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।