बलौदाबाजार, । बीएड प्रवेश परीक्षा के दौरान अंबेडकर चौक स्थित परीक्षा केंद्र में जो हुआ, उसने परीक्षा प्रबंधन की कार्यप्रणाली और अभ्यर्थियों के सम्मान दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्रेस कोड के नाम पर कथित तौर पर दर्जनों अभ्यर्थियों के कपड़ों को कैंची से काटे जाने की घटना ने छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
प्रतियोगी परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप है कि केंद्र में प्रवेश के दौरान नियमों का हवाला देकर उनके शर्ट, सलवार-सूट और अन्य वस्त्रों में कैंची से कट लगा दिए गए। सवाल यह है कि क्या परीक्षा केंद्रों को अभ्यर्थियों के कपड़े काटने का अधिकार है? यदि ड्रेस कोड का उल्लंघन हुआ था तो इसकी जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई? और यदि नियम थे तो उनकी लिखित प्रति अभ्यर्थियों को क्यों नहीं दिखाई गई?
दूर-दराज़ गांवों और कस्बों से परीक्षा देने पहुंचे युवाओं का कहना है कि वे पहले ही प्रतियोगी परीक्षा के दबाव में थे, ऊपर से केंद्र में उनके साथ किया गया व्यवहार उन्हें मानसिक रूप से विचलित कर गया। कई अभ्यर्थियों ने इसे सार्वजनिक अपमान बताया। उनका कहना है कि नियमों के पालन के नाम पर गरिमा और सम्मान को ताक पर नहीं रखा जा सकता।
सबसे ज्यादा आक्रोश इस बात को लेकर है कि कथित रूप से 20 से अधिक अभ्यर्थियों के कपड़ों में कट लगाए गए, जिनमें छात्राएं भी शामिल थीं। आरोप है कि एक गर्भवती महिला अभ्यर्थी के कोहनी तक के कपड़े को भी नियमों के नाम पर काट दिया गया। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संवेदनशीलता की गंभीर कमी का मामला भी बनता है।
घटना के बाद कई अभ्यर्थियों और परिजनों ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अब तक जिम्मेदार पक्ष की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। यही वजह है कि मामले को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब सवाल उठ रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि यदि उनके वस्त्र परीक्षा नियमों के अनुरूप नहीं थे तो केंद्र प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या परीक्षा केंद्र पर अतिरिक्त कपड़े, स्टोल या अन्य समाधान उपलब्ध नहीं कराए जा सकते थे? क्या अभ्यर्थियों की सहमति ली गई थी? इन सवालों का जवाब अभी तक सामने नहीं आया है।
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब सूत्रों के अनुसार परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थियों की एंट्री सुबह 9:30 बजे तक हो चुकी थी, जबकि परीक्षा 10 बजे शुरू होनी थी। इसके बावजूद प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं के वितरण में लगभग 10 से 15 मिनट की देरी हुई। ऐसे में परीक्षा प्रबंधन की तैयारी और व्यवस्था दोनों कटघरे में नजर आ रही हैं।
घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के साथ व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा केंद्र सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए होते हैं, न कि अभ्यर्थियों को अपमानित करने के लिए। उनका आरोप है कि नियमों की आड़ में अपनाया गया यह रवैया न केवल अमानवीय था बल्कि इससे परीक्षा के दौरान उनका आत्मविश्वास और प्रदर्शन भी प्रभावित हुआ।
अब सभी की निगाहें छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) पर टिकी हैं। अभ्यर्थियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट एवं मानवीय दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
बड़ा सवाल अब भी कायम है— क्या ड्रेस कोड के पालन के नाम पर किसी अभ्यर्थी के कपड़े काटे जा सकते हैं, या फिर यह नियमों की आड़ में की गई मनमानी थी?