महासमुंद। जिले में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने गुरुवार शाम पेट्रोल पंप संचालकों और ऑयल कंपनियों के विक्रय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में ईंधन की उपलब्धता, बढ़ती मांग और वितरण व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की कमी संबंधी अफवाहों के कारण अचानक मांग बढ़ गई है। जो उपभोक्ता पहले 100-200 रुपये का पेट्रोल डलवाते थे, वे अब टैंक फुल कराने पहुंच रहे हैं। इससे कुछ पेट्रोल पंपों पर दबाव की स्थिति बन रही है और लोगों की भीड़ बढ़ रही है।
ऑयल कंपनियों के विक्रय अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में 7 लाख 18 हजार लीटर पेट्रोल और 7 लाख 33 हजार लीटर डीजल उपलब्ध है। यह स्टॉक जिले की औसत दैनिक खपत के अनुसार पेट्रोल के लिए लगभग 5 दिन और डीजल के लिए 2 दिन तक पर्याप्त है। साथ ही कंपनियों द्वारा लगातार ईंधन की आपूर्ति जारी रखी जा रही है।
कलेक्टर ने कहा कि यदि लोग पैनिक की स्थिति नहीं बनाएंगे तो जिले में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी रहेगी। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रम पर ध्यान न दें और आवश्यकता पड़ने पर ही ईंधन खरीदें। अनावश्यक रूप से लाइन लगाने और घरों में पेट्रोल-डीजल का भंडारण करने से बचें।
बैठक में ईंधन वितरण को नियंत्रित और व्यवस्थित रखने के लिए कुछ अस्थायी सीमाएं भी तय की गईं। इसके तहत दुपहिया वाहनों में 200 रुपये तक, कारों में 1500 रुपये तक, ट्रक एवं बसों में 10 हजार रुपये तक तथा कृषि कार्य में उपयोग होने वाले वाहनों के लिए जरिकेन में 2 हजार रुपये तक ईंधन एक बार में देने का निर्णय लिया गया।
बैठक में रवि कुमार साहू, तेजपाल ध्रव, तरूण नायक सहित ऑयल कंपनियों के अधिकारी और जिले के पेट्रोल-डीजल पंप संचालक मौजूद रहे।