तेंदूपत्ता संग्राहकों पर असर प्रबंधकों की हड़ताल छठे दिन भी जारी

SARJU PRASAD SAHU

April 28, 2026

बसना। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता व्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के 902 प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जो मंगलवार को छठे दिन में प्रवेश कर गई। अब तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से प्रबंधकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

हड़ताल का सीधा असर प्रदेश के लगभग 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों और 65 लाख से अधिक संग्राहकों की आजीविका पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं महासमुंद जिले में 1 मई से शुरू होने वाली तेंदूपत्ता खरीदी भी प्रभावित हो सकती है, जिससे एक लाख से अधिक ग्रामीणों पर संकट मंडरा रहा है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि प्रबंधक पिछले 38 वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण, लघु वनोपज खरीदी और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, वेतनमान, पेंशन और मेडिकल सुविधाएं नहीं मिली हैं। इसे उन्होंने लंबे समय से जारी अन्याय” बताया।

प्रबंधकों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्स लेवल 07, 08 और 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और लंबित भुगतानों का निराकरण शामिल है। संघ का आरोप है कि पूर्व में कई बार ज्ञापन सौंपे गए और आश्वासन भी मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

संघ के अनुसार हड़ताल के कारण तेंदूपत्ता संग्रहण के साथ-साथ 67 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी, बोनस, बीमा और अन्य योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

प्रबंधकों ने विभाग पर दमनात्मक नीति अपनाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 2025 में भी हड़ताल के बाद मंत्रालय स्तर पर मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में वादाखिलाफी की गई। इसी कारण इस बार आर-पार की लड़ाई का निर्णय लिया गया है।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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