देवभोग। जनपद पंचायत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए बनाए गए शासकीय आवासों को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एम्बुलेंस चालक ओम कुमार साहू, पशु अधिकारी भीष्म कुमार साहू सहित अन्य विभागों के कर्मचारी इन आवासों पर कब्जा जमाए बैठे हैं, जबकि वास्तविक पात्र जनपद कर्मचारी आवास से वंचित हैं।
नियमों का उल्लंघन, अन्याय की आशंका जनपद पंचायत कार्यालय के समीप करीब 6 आवास बनाए गए हैं, जहां वर्षों पहले जनपद स्टाफ निवास करता था। वर्तमान में इन आवासों पर जनपद पंचायत से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बजाय अन्य विभागों के कर्मचारी निवास कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से अधिकांश के पास हाउसिंग बोर्ड में स्वयं के आवास होने के बावजूद वे जनपद परिसर के आवासों में रह रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जनपद परिसर के आवास केवल संबंधित विभाग के कर्मचारियों के लिए ही आवंटित किए जाने चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में बाहरी विभागों के कर्मचारियों ने कब्जा जमा रखा है। इससे न केवल पात्र कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
कर्मचारियों को दूर से आना पड़ रहा है सबसे दुखद पहलू यह है कि जनपद पंचायत में कार्यरत कई कर्मचारी एवं ऑपरेटर बाबू देर रात तक कार्यालय में काम करते हैं, फिर भी उन्हें 12 से 15 किलोमीटर दूर स्थित कदलीमुड़ा, बरकानी, दहीगांव आदि गांवों में अपने घर जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह आवागमन और भी कठिन हो जाता है।
स्थानीय सीईओ सहित तमाम अधिकारी इस स्थिति से अवगत होने के बावजूद अब तक कोई पहल नहीं की गई है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते जनपद कर्मचारी रोजाना दूर से आकर अपने पंचायती कार्यों को अंजाम देने को मजबूर हैं।
आवासों की दयनीय स्थिति जनपद कर्मचारियों के न होने और अधिकारियों की उदासीनता के कारण ये आवास खंडहर की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। बरसात के पानी से बचने के लिए तालपत्री का सहारा लेना पड़ता है। संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर रखरखाव न किए जाने से आवासों की हालत दयनीय हो गई है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में ये शासकीय आवास पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।
जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की मांग स्थानीय लोगों एवं कर्मचारियों ने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए आवास खाली कराने की मांग की है, ताकि जनपद कार्यालय के कर्मचारियों को आवास आवंटित किए जा सकें।
इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अनियमितता पर कब तक सख्त कदम उठाता है और कर्मचारियों को दीर्घकालिक राहत प्रदान कर पाता है। जिला सीईओ से आवासों की मरम्मत कर जनपद कर्मचारियों को आवास आवंटित करने की मांग भी की जा रही है, ताकि देर रात कार्य करने वाले कर्मचारियों को सहूलियत मिल सके।