बलौदाबाजार, 19 अप्रैल 2026।
अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में विवाह होने के कारण बाल विवाह की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं पुलिस की संयुक्त टीमों ने जिले भर में सक्रिय निगरानी की।
इस दौरान 5 प्रकरणों में कुल 8 नाबालिगों के विवाह को रोका गया। एक मामले में भारतीय न्याय संहिता एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई, वहीं दूसरे मामले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई भी की गई।
पहले दिन 19 अप्रैल को पलारी, कसडोल एवं सिमगा विकासखंड के गांवों में टीमों ने विवाह समारोहों का निरीक्षण किया। सिमगा के ग्राम चैरेंगा एवं बछेरा में नाबालिग बालकों के विवाह की जानकारी मिलने पर दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। उन्हें कानून की जानकारी देकर बाल विवाह रोकने के लिए तैयार किया गया तथा घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए गए।
इस प्रकार अक्षय तृतीया के अवसर पर प्रशासन ने चार ऐसे विवाहों को रोका जिनमें वर-वधु की आयु पूर्ण नहीं थी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” (31 मार्च 2029 तक) के संकल्प को पूरा करने हेतु प्रशासन अब सख्ती बरत रहा है। बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों से बचाने और बच्चों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
जिला बाल संरक्षण इकाई की पूरी टीम ने इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।