बलौदा बाजार से मंत्रालय तक—तेजतर्रार अफसर शैलाभ साहू की एंट्री, मंत्री केदार कश्यप के खास बने

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

April 17, 2026

बलौदा बाजार/ प्रशासनिक गलियारों में अपनी तेज़ कार्यशैली और तकनीकी पकड़ के लिए पहचान बना चुके शैलाभ साहू को अब सत्ता के केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। राज्य शासन ने उन्हें वन, परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप का विशेष सहायक नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि इस नियुक्ति से मंत्री कार्यालय की कार्यशैली में अब तेज़ी और धार दोनों देखने को मिलेंगी।
बलौदा बाजार में डिप्टी कलेक्टर रहते हुए अपनी सख्त प्रशासनिक पकड़ और प्रभावी फैसलों से अलग पहचान बनाने वाले साहू अब सीधे मंत्री के कोर सिस्टम का हिस्सा बन गए हैं। उनकी एंट्री ऐसे समय में हुई है, जब मंत्री कार्यालय में यह अहम पद काफी समय से खाली था और कामकाज की रफ्तार पर असर पड़ रहा था।
दरअसल, मंत्री बनने के बाद केदार कश्यप ने तीर्थराज अग्रवाल को अपना विशेष सहायक बनाया था, लेकिन उनके IAS में प्रमोट होते ही यह कुर्सी खाली हो गई। इसके बाद एक ऐसे अफसर की तलाश थी, जो न सिर्फ सिस्टम समझे बल्कि उसे गति भी दे—और यह तलाश आकर शैलाभ साहू पर थमी।
2013 बैच के इस अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है—टेक्नोलॉजी के जरिए सिस्टम को बदलने की सोच। परिवहन विभाग में रहते हुए उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जैसी जटिल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और आसान बनाकर आम लोगों को राहत दी। उनके फैसलों ने न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाई, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाने का काम किया।
GAD में तैनाती के दौरान भी उन्होंने सिस्टम में सीधे दखल देते हुए बायोमेट्रिक अटेंडेंस और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती से लागू कराया। फाइलों की धीमी रफ्तार को तेज़ करना हो या सरकारी कामकाज को कागजरहित बनाना—हर मोर्चे पर उनका काम असरदार रहा।
अधिकारियों के बीच उनकी छवि ऐसे अफसर की है, जो सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि सिस्टम को बदलकर दिखाता है। यही वजह है कि उन्हें अब मंत्री कार्यालय में सबसे अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
अब जब शैलाभ साहू सीधे मंत्री केदार कश्यप के साथ काम करेंगे, तो साफ है कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी, सख्ती और परिणाम—तीनों का कॉम्बिनेशन नजर आएगा।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि सिस्टम में “स्पीड और स्ट्राइक” लाने की रणनीति मानी जा रही है—जहां अब फैसले भी तेज़ होंगे और असर भी साफ दिखेगा।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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