बलौदाबाजार, 28 अक्टूबर 2025/
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने जिले के जनपद पंचायत कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत भुसड़ीपाली (वीरनारायणपुर) निवासी श्रीमती लक्ष्मीन बाई / रामसाय के जीवन में नई खुशियाँ भर दी हैं। मिट्टी की झोपड़ी से लेकर पक्के मकान तक का यह सफर उनके लिए जीवन बदलने वाली कहानी साबित हुआ है।
🌿 लक्ष्मी बाई की सफलता की कहानी
47 वर्षीय लक्ष्मी बाई, जो अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, लंबे समय तक अपने परिवार के साथ झोपड़ीनुमा कच्चे मकान में रहती थीं। बरसात के दिनों में घर की छत टपकती थी, मिट्टी का फर्श गीला रहता था और चारों ओर असुविधा का माहौल था।
उन्होंने बताया —
“बरसात में घर में पानी भर जाता था। मैं छोटे-से झोपड़ीनुमा मकान में अपने बच्चों के साथ किसी तरह जीवनयापन करती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिलने के बाद मैंने आवेदन किया और यह योजना मेरे जीवन में वरदान बनकर आई।”
🏗 योजना से मिला पक्का मकान और आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-25 में लक्ष्मी बाई का नाम स्वीकृत हुआ। उन्हें ₹1,20,000 की राशि तीन किश्तों में प्राप्त हुई —
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पहली किश्त ₹25,000
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दूसरी ₹40,000
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तीसरी ₹55,000
कुल निर्माण लागत लगभग ₹1,45,000 रही। अतिरिक्त कार्य के लिए लक्ष्मी बाई ने मनरेगा अंतर्गत मजदूरी कर अतिरिक्त संसाधन जुटाए।
योजना के कार्यान्वयन में प्रारंभिक तकनीकी कठिनाइयों के बावजूद पंचायत एवं विभागीय अधिकारियों के सहयोग से मकान का निर्माण सुचारू रूप से पूरा हुआ।
💬 हितग्राही ने जताया आभार
लक्ष्मी बाई ने कहा —
“अब मेरा घर पक्का और सुरक्षित है। छत से पानी नहीं टपकता, दीवारें मजबूत हैं और मेरे बच्चों के पास पढ़ने के लिए स्थान है। मैं आज बहुत खुश हूँ और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए शासन का आभार व्यक्त करती हूँ।”
🌸 मुख्य जानकारी एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हितग्राही का नाम | श्रीमती लक्ष्मीन बाई / रामसाय |
| योजना वर्ष | 2024-25 |
| घर का स्थान | ग्राम भुसड़ीपाली (वीरनारायणपुर) |
| परिवार के सदस्य | 2 |
| स्वीकृत राशि | ₹1,20,000 |
| कुल व्यय | ₹1,45,000 |
| योजना | प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) |
| जनपद पंचायत | कसडोल, जिला बलौदाबाजार (छ.ग.) |
🟩 “कच्चे से पक्के घर तक” की प्रेरणादायक मिसाल
लक्ष्मी बाई की कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री आवास योजना न केवल आश्रय का साधन है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मानजनक जीवन और खुशहाल भविष्य की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।
