कोरबा जिले में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब प्रशासनिक व्यवस्था को धता बताते हुए खुलेआम रेत और कोयले की चोरी की जा रही है। राताखार एनीकेट डेम और एसईसीएल खदानों के आसपास बिना रॉयल्टी के अवैध रेत उत्खनन और कोयला चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
राताखार–दर्री मुख्य मार्ग के समीप हसदेव नदी पुल के पास बने एनीकेट डेम से चोरी-छिपे भारी मात्रा में बालू की तस्करी की जा रही है। ट्रैक्टर, हाइवा और अन्य भारी वाहनों से दिन-रात रेत का अवैध परिवहन जारी है। इस क्षेत्र को रेत माफियाओं ने बालू चोरी का “मुख्य अड्डा” बना लिया है, जहाँ बिना किसी वैध अनुमति और रॉयल्टी के खनन हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डेम के पास करीब 300 ट्रक रेत का अवैध भंडारण किया गया है। इतना ही नहीं, निगरानी के लिए रेत माफियाओं ने टीन की झोपड़ी बनाकर सब्जी और अनाज की खेती भी शुरू कर दी है ताकि बाहरी लोगों को शक न हो सके।
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🛑 पुलिस और प्रशासन पर उठे सवाल
महज कुछ ही दूरी पर सर्वमंगला पुलिस चौकी और कोरबा कोतवाली होने के बावजूद अवैध खनन पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है।
एसईसीएल कुसमुंडा कोयला खदान में भी यही हाल है — सुरक्षा के लिए तैनात सीआईएसएफ जवानों की मौजूदगी में ही कोयला चोरी की जा रही है। साइकिलों और छोटे वाहनों में कोयला भरकर रोज़ाना लाखों रुपये का अवैध कारोबार जारी है।
कुछ दिन पहले कुसमुंडा में कोयला तस्करी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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⚠️ नशे और अवैध कारोबार का केंद्र बन रहा क्षेत्र
सर्वमंगला चौकी के पीछे स्थित ग्राम गोपालपुर में भी अवैध रूप से दारू, रासी, माढ़ जैसी मादक वस्तुओं का निर्माण किया जा रहा है। यहां के बच्चे, युवा और बुजुर्ग तक नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, परंतु प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
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🗣️ जनता का सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है —
> “रेत और कोयले की चोरी सबकी नजरों के सामने हो रही है, लेकिन कोई अधिकारी कुछ नहीं कर रहा। मंत्री और विधायक आंख मूंदकर बैठे हैं। अगर यही विकास है, तो कोरबा का भविष्य अंधकारमय है।”
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📍 अब सवाल उठता है —
क्या प्रशासन इन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या “कोरबा का विकास” इसी तरह चोरी और अवैध कारोबार के साए में चलता रहेगा?