अब गांव-गांव पहुंचेगी पशु चिकित्सा सेवा – मोबाइल वेटनरी यूनिट से हो रहा पशुओं का घर पहुंच उपचार

TEJASWI NATH SONI

November 11, 2025

📍 बलौदाबाजार, 11 नवम्बर 2025 | स

 

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को अब अपने पशुओं के उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला प्रशासन द्वारा संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट (Mobile Veterinary Unit) योजना के माध्यम से अब पशुओं का इलाज, टीकाकरण, जांच और उपचार गांव-गांव में ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

यह पहल ग्रामीण अंचलों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के साथ ही पशुपालन व्यवसाय को और अधिक सुरक्षित एवं लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

 

 

 

🔸 हर विकासखंड में मोबाइल वेटनरी यूनिट सक्रिय

 

जिले के सभी 5 विकासखंडों — बलौदाबाजार, भाटापारा, कसडोल, पलारी और सिमगा में मोबाइल वेटनरी यूनिट सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

इन यूनिट्स में पशु चिकित्सक, तकनीकी सहायक और आवश्यक उपकरणों के साथ वाहन उपलब्ध हैं। प्रत्येक टीम प्रतिदिन तीन ग्रामों का भ्रमण करती है और वहां पशुओं का उपचार, टीकाकरण और रोग जांच करती है।

 

 

 

🔸 सेवाएं — घर बैठे इलाज और जागरूकता

 

उप संचालक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि मोबाइल वेटनरी यूनिट न केवल बीमार पशुओं का इलाज करती है, बल्कि ग्रामीणों को पशु स्वास्थ्य, पोषण और रोग-नियंत्रण के प्रति जागरूक भी करती है।

इसमें पशुओं का —

🐄 टीकाकरण

🐐 बधियाकरण

🐃 छोटे शल्य क्रियाएं

🐕 कृत्रिम गर्भाधान

🐄 रोग परीक्षण और सैंपल कलेक्शन

जैसी सेवाएं दी जाती हैं।

 

 

 

🔸 समय और संपर्क व्यवस्था

 

मोबाइल वेटनरी यूनिट प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित रहती है।

पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

साथ ही विकासखंडवार यूनिट से सीधे संपर्क भी किया जा सकता है:

 

📍 बलौदाबाजार: डॉ. नेहा यादव – 📞 62663 58615

📍 भाटापारा: डॉ. विनय कुमार – 📞 87706 83139

📍 कसडोल: डॉ. दीपक दीवान – 📞 62604 45462

📍 पलारी: डॉ. गोपाल पटेल – 📞 72229 48928

📍 सिमगा: डॉ. चंद्रप्रकाश खरे – 📞 93409 09443

 

 

 

🔸 गांवों में बढ़ रहा भरोसा

 

मोबाइल वेटनरी सेवा के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों को अब पशुओं के उपचार के लिए निजी क्लिनिकों या शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होती है, बल्कि पशु मृत्यु दर में भी कमी आई है।

सह संपादक

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