लच्छनपुर। ग्राम लच्छनपुर स्थित श्री राम-जानकी मंदिर के पुजारी महंत श्री परमानंद जी महाराज को रविवार को पूरे गांव ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनके निधन से गांव में शोक की लहर दौड़ गई और हर वर्ग के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
महंत श्री परमानंद जी महाराज कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही ग्रामवासियों में शोक की भावना व्याप्त हो गई।
महंत श्री परमानंद जी महाराज वर्ष 1972 से लेकर वर्तमान समय तक भगवान श्री राम की सेवा में लीन रहे। उन्होंने अपना जीवन श्री राम-जानकी मंदिर की पूजा-अर्चना, धार्मिक गतिविधियों और ग्रामवासियों के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में समर्पित कर दिया। उनकी सादगी, सेवा भावना और धर्मनिष्ठ जीवन ने उन्हें गांव के हर घर में आदर दिलाया।
उनकी अंतिम यात्रा में ग्राम के सभी ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नम आंखों से अपने प्रिय संत को अंतिम विदाई दी।
बंधवा तालाब परिसर में महंत श्री परमानंद जी महाराज का दाह संस्कार किया गया। इस अवसर पर साधू-संत और संत महात्मा सहित श्रद्धालुओं तथा आसपास के गांवों से आए लोगों की भारी उपस्थिति रही। गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष महंत श्री राम सुन्दर दास जी महाराज भी दर्शन एवं श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
अंत्येष्टि कार्यक्रम में ग्राम के सरपंच भूपेन्द्र साहू, उपसरपंच शिवलाल साहू, दिलहरण यदु, उमाशंकर साहू, मनहरण साहू, शत्रुघ्न पटेल, जीवराखन साहू, रमेश साहू, गैंदराम साहू, डॉ. मनहरण, दीनू साहू, राजाराम फेकर, रामचंद्र साहू, चतुर साहू, खेमराम साहू तथा सुशील महाराज सहित गांव व आसपास के प्रमुख जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ग्रामवासियों ने कहा कि महंत श्री परमानंद जी महाराज ने केवल मंदिर की सेवा ही नहीं की, बल्कि पूरे गांव के धार्मिक और सामाजिक जीवन को भी दिशा दी। उनके आशीर्वाद, स्नेह और मार्गदर्शन की स्मृतियां सदैव ग्रामवासियों के हृदय में जीवित रहेंगी।
सभी उपस्थित लोगों ने भगवान श्री राम से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार और श्रद्धालुओं को इस दुख की घड़ी में संबल दें। महंत श्री परमानंद जी महाराज की सेवा, त्याग और भक्ति की गाथा लच्छनपुर गांव में सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण की जाएगी।