परीक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल, बोले– “बर्बाद हो गया हमारा पूरा एक साल”

BIRENDRA KUMAR SEN

June 5, 2026

बेमेतरा: परीक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल, बोले– “बर्बाद हो गया हमारा पूरा एक साल”

​अजीब फरमान: समय के साथ-साथ ‘ड्रेस कोड’ भी बना रोड़ा, निर्धारित कपड़े न होने पर कई छात्रों को किया गया बाहर

बेमेतरा।

बेमेतरा से इस वक्त की एक बड़ी और बेहद परेशान कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ डीईएलईडी (D.El.Ed.) परीक्षा देने पहुंचे कई छात्र-छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गए। गुरुवार को बेमेतरा के बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और लक्ष्मण प्रसाद वैद्य कन्या महाविद्यालय के परीक्षा केंद्रों के बाहर एक अजीब और बेबसी का नजारा देखने को मिला। घंटों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा केंद्र पहुंचे छात्र गेट के बाहर खड़े होकर भीतर जाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी। ठीक 10 बजे से पहले ही परीक्षा केंद्र का मुख्य गेट बंद कर दिया गया, जिसके बाद कई छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

​बेमेतरा के इन दोनों प्रमुख परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्रों का गुस्सा और बेबसी साफ देखी जा सकती थी। नियमों का हवाला देकर प्रबंधन ने ठीक 10 बजे से पहले ही दरवाजे बंद कर दिए। गेट के बाहर खड़े छात्र-छात्राएं रोते हुए और हाथ जोड़कर भीतर जाने की विनती करते रहे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों और केंद्र प्रभारियों का दिल नहीं पिघला।

​छात्रों का गंभीर आरोप है कि वे समय पर पहुंच चुके थे और महज एक मिनट की देरी या कुछ सेकंड के अंतर के कारण उनके जीवन का पूरा एक साल दांव पर लगा दिया गया। वहीं, कुछ छात्रों को परीक्षा के तय ‘ड्रेस कोड’ (निर्धारित कपड़े) में न होने का हवाला देकर केंद्र के भीतर प्रवेश ही नहीं दिया गया।

पीड़ित छात्र/छात्रा:

“हम महीनों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। हम समय पर पहुंच गए थे, सिर्फ कुछ सेकंड का हेर-फेर हुआ और इन्होंने हमारे सामने गेट बंद कर दिया। हम हाथ जोड़ते रहे, रोते रहे, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। कुछ साथियों को तो सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उनके कपड़े तय ड्रेस कोड के मुताबिक नहीं थे। नियमों की इस सनक ने हमारा पूरा एक साल बर्बाद कर दिया। अब हमारा भविष्य क्या होगा? हम प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हैं।”

 

​इस घटना के बाद से छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा में अनुशासन जरूरी है, लेकिन चंद सेकंड की देरी या कपड़ों के आधार पर किसी का पूरा भविष्य दांव पर लगा देना सरासर अन्याय है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी छात्रों को कोई राहत देते हैं या नियमों की इस बेड़ियों में छात्रों का साल यूं ही बर्बाद हो जाएगा।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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